एसडीएम अनुभव मेहता ने करनाल में सीपीआर प्रशिक्षण जागरूकता वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना

सुमित योगी
करनाल
एसडीएम अनुभव मेहता ने करनाल में सीपीआर प्रशिक्षण जागरूकता वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना
सीपीआर तकनीक से इमरजेंसी में बचाई जा सकती है जान : एसडीएम
हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आने पर व्यक्ति को दिया जा सकता है जीवनदान
करनाल 8 सितम्बर। एसडीएम ने कहा कि आज की भागदौड़ भरे जीवन में कार्डियक अरेस्ट के बढ़ते मामलों के मद्देनजर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) से इमरजेंसी में किसी इंसान की जान बचाई जा सकती है। सीपीआर एक ऐसी तकनीक है जिससे हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आने पर किसी को जीवनदान दिया जा सकता है।
एसडीएम ने शुक्रवार को भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की हरियाणा शाखा की ओर से सीपीआर प्रशिक्षण अभियान के तहत चलाई गई सीपीआर प्रशिक्षण जागरूकता वैन को लघु सचिवालय परिसर से झंडी दिखाकर रवाना किया। सीपीआर प्रशिक्षण टीम तीन दिनों तक जिला के गांवों में स्कूल और कॉलेजों में निशुल्क प्रशिक्षण दें रही हैं। 9 सितम्बर को विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का समापन करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में किया जाएगा।
इस अवसर पर एसडीएम अनुभव मेहता ने डमी पर सीपीआर तकनीक का प्रशिक्षण लेते हुए उनका अभ्यास भी करके देखा। उन्होंने बताया कि दुर्घटनावश, दिल का दौरा पडऩे पर, बेहोशी में सांस आना बंद हो जाए और दिल काम करना बंद दे, उस अवस्था में सीपीआर अर्थात हृदय गति को दोबारा से कैसे चलाएं की जानकारी सीपीआर जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को दी जा रही है। उन्होंने आमजन का आह्वान करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को इस प्रकार का प्रशिक्षण लेना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सीपीआर प्रशिक्षण जागरूकता वैन को प्रदेश के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय द्वारा चंडीगढ़ से झंडी दिखाकर रवाना किया गया था,जो कि 25 जुलाई से 9 सितंबर तक प्रदेश के सभी जिलों को कवर कर रही है। वैन में सीपीआर प्रशिक्षण से संबंधित हरियाणवी भाषा में एलईडी स्क्रीन पर लघु नाटिका भी दिखाई जा रही है।
सीपीआर प्रशिक्षण बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोग्राम : एसडीएम
एसडीएम अनुभव मेहता ने कहा कि सीपीआर देने के लिए डॉक्टर की जरूरत नहीं है आप इसे खुद दे सकते है। इसके लिए आपको सही तकनीक पता होना जरूरी है। आए दिन होने वाले अनेक एक्सीडेंट, बिजली का करंट, दम घुटने से, पानी में डूबने की वजह से कई लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। यदि सही समय पर सीपीआर दिया जाए तो कई लोगों की जान बच भी सकती है। एक्सीडेंट या और कोई वजह से हृदय की गति रुक जाती है, सांस रुक जाती है तो उस गोल्डन पीरियड में यह तकनीक बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे इंसान की जान बचने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि सीपीआर प्रशिक्षण एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोग्राम है।
सीपीआर के जिला के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आमजन को किया गया जागरूक
दूसरी ओर रेडक्रॉस सचिव कुलबीर मलिक ने बताया कि मानव जीवन की रक्षा करना रेडक्रॉस का पहला कार्य है इसी उद्देश्य के साथ ग्रामीण स्तर पर भी सी.पी.आर. के प्रति आमजन को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को नगर निगम व करनाल जिला के खंड निसिंग के ग्रामीण क्षेत्र में सीपीआर का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है और इस प्रक्षिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों और विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
इस अवसर पर जिला प्रशिक्षण अधिकारी राजपाल चौधरी, फर्स्ट एड लेक्चरर डॉ नीना,नरेश पाल, राकेश कुमार सहित रेडक्रॉस की टीम से प्रदीप कुमार, सुरेंद्र सिंह व टीम के अन्य सदस्य उपस्थित थे।


















