इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुजुर्ग माता-पिता को बेदखल करने पर लगाई रोक, विधवा बेटी को नोटिस जारी

प्रयागराज/वाराणसी:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए वाराणसी के दो वरिष्ठ नागरिकों को उनके अपने घर से बेदखल करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने यह आदेश सुरेंद्र नाथ सिंह और अन्य द्वारा दायर याचिका (संख्या 2271/2026) पर सुनवाई करते हुए दिया।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं, जिनकी उम्र क्रमशः 80 और 75 वर्ष है, ने आरोप लगाया है कि उनकी विधवा बेटी (प्रतिवादी) ने धोखाधड़ी से कुछ उपहार विलेखों (Gift Deeds) और समझौतों पर हस्ताक्षर करवा लिए। इन दस्तावेजों के आधार पर वह उस आवासीय घर के मालिकाना हक का दावा कर रही है जिसमें बुजुर्ग माता-पिता वर्तमान में रह रहे हैं।
मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब बुजुर्गों को घर से निकालने की कोशिश की गई, जिसके संबंध में 14 जनवरी 2026 को एक एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई गई थी। इसमें शारीरिक हमला करने और चाबियां छीनने के आरोप लगाए गए थे।
निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप
इससे पहले, वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने 4 फरवरी 2026 को बिना दूसरे पक्ष को सुने अंतरिम निषेधाज्ञा (Injunction) देने से इनकार कर दिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए माना कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:
• बेदखली पर रोक: अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं को उनकी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा।
• तीसरे पक्ष का अधिकार: विवादित संपत्ति के संबंध में कोई भी तीसरा पक्ष अधिकार (Third Party Rights) नहीं बनाया जाएगा।
• नोटिस जारी: अदालत ने प्रतिवादी बेटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत ने टिप्पणी की कि माता-पिता की वृद्धावस्था और उनके साथ हुए व्यवहार को देखते हुए, यदि तत्काल राहत नहीं दी जाती तो न्याय का उद्देश्य ही विफल हो जाता। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को होगी।


















