आरटीआई में बड़ा खुलासा:नगर पालिका परिषद में विज्ञापन के नाम पर लाखों का घोटाला,नियम ताख पर रखकर ज़ारी किये गये विज्ञापन।

आरटीआई में बड़ा खुलासा : जसपुर नगर पालिका परिषद में विज्ञापन के नाम पर लाखों रुपये की धनराशि का घोटाला, नियम ताख पर रखकर ज़ारी किये गये विज्ञापन।
जसपुर : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी सरकार की ज़ीरो टॉरलेंस की नीति को अधिकारी और कर्मचारी ही पलीता लगा रहे है, ताज़ा मामला जसपुर नगर पालिका परिषद का सामने आया है जिसमे आरटीआई कार्यकर्ता के द्वारा मांगी गई सूचना में खुलासा हुआ कि जसपुर नगर पालिका परिषद के द्वारा कुछ समाचार पत्रों को विज्ञापन के नाम पर मिलीभगत कर लाखों रुपये की धनराशि निकालकर कर खुर्दबुर्द कर ली गयी।
मिस्सरवाला निवासी आरटीआई कार्यकर्ता आसिम अज़हर के द्वारा इसका खुलासा नगर पालिका परिषद जसपुर से मांगी गई सूचना में हुआ।
नगर पालिका परिषद के द्वारा उत्तराखंड प्रिन्ट मीडिया विज्ञापन नियमावली, उत्तराखंड शासन सूचना अनुभाग-1 संख्या- 424/ XXII(1) / 2016- 7 (11) 2012 दिनांक- 12 सितम्बर 2016 के अनुसार ज़ारी नही किये गये है। उक्त नियमावली का पालन नही किया गया है। जबकि शासनादेश के अनुसार उत्तराखंड सरकार के समस्त शासकीय विभागों के वर्गीकृत एव सजावटी विज्ञापन सूचना विभाग के महानिदेशालय (मुख्यालय) के माध्यम से ही ज़ारी किये जाने चाहिए थे। अयनिमित समाचार पत्रों को किसी भी दशा में विज्ञापन ज़ारी नही किये जाने चाहिये थे परन्तु नगर पालिका परिषद जसपुर के द्वारा नियमानुसार दैनिक, सांध्य दैनिक, साप्ताहिक व पाक्षिक समाचार पत्र व पत्रिकाओं को विज्ञापन सूचना विभाग के महानिदेशालय (मुख्यालय) के माध्यम से ज़ारी नही करा कर स्वयं आर.ओ. (R.O) ज़ारी कर विज्ञापनों का भुगतान कर दिया गया। शासनादेश के अनुसार उत्तराखंड सरकार के समस्त शासकीय वर्गीकृत एव सजावटी विज्ञापन सूचना विभाग के महानिदेशालय (मुख्यालय) के माध्यम से ही ज़ारी किये जाने चाहिए थे।
जबकि अयनिमित समाचार पत्रों को किसी भी दशा में विज्ञापन ज़ारी नही किये जायेंगे परन्तु नगर पालिका परिषद जसपुर द्वारा अयनिमित व उत्तराखंड राज्य से बाहर के समाचार पत्रों को नियम विरुद्ध विज्ञापन ज़ारी कर विज्ञापनों का भुगतान कर दिया गया। शासनादेश के अनुसार उत्तराखंड सरकार के समस्त शासकीय विभागों के वर्गीकृत एव सजावटी विज्ञापनों को डी.ए.वी.पी./ विभागीय दरों पर प्रकाशित कराया जाना चाहिये था।
परन्तु कुछ समाचार पत्रों को डी.ए. वी.पी. एवं विभागीय दरों से अधिक दरों पर भुगतान किया गया है एवं राज्य सरकार की धनराशि को खुर्दबुर्द कर हानि पहुँचाई गयी है। जबकि दैनिक, सांध्य दैनिक, साप्ताहिक व पाक्षिक समाचार पत्र एव पत्रिकाओं को ज़ारी किये गये विज्ञापनों का भुगतान शासकीय माप के अनुसार करना चाहिए था लेकिन ऐसा नही किया और नाही, विज्ञापनों के आर.ओ. (R.O) सम्बन्धित समाचार पत्रों के सम्पादकों / विज्ञापन व्यवस्थापकों को ज़ारी किये गये परन्तु समाचार पत्रों को चैक ज़ारी करना चाहिए था परन्तु ऐसा नही कर नियम विरुद्ध समाचार पत्र एजेन्सी को भुगतान किया गया जब कि नियमानुसार वह इसके लिये अधिकृत नही थे।
आपको बता दें कि नगर पालिका परिषद जसपुर में लूट-खसौट का यह पहला मामला नही है। आये दिन कभी पालिका अध्यक्ष, कभी नगर पालिका सभासद, तो कभी नगर पालिका परिषद कर्मचारियों के फर्ज़ीवाड़े के मामले सामने आते ही रहते है। सूत्रों की माने तो कुछ एक के तो कोर्ट में मामले विचाराधीन है। पूरा दिन नगर पालिका परिषद में दलालों का जमावड़ा बना रहता है। बता दें कि नगर पालिका परिषद जसपुर में कभी सड़क बनाने के नाम पर, कभी स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर, कही भराव के नाम पर, तो कही भूमि हड़पने का नाम पर, तो कही गृहकर की बंदरबांट के मामले सामने आ ही जाते है। जिसको लेकर नगर पालिका परिषद चर्चाओं में बनी रहती है।
वही आरटीआई कार्यकर्ता आसिम अज़हर का कहना है कि नगर पालिका परिषद जसपुर के द्वारा वर्ष 2016 विज्ञापन नियमावली का पालन नही किया गया है। राज्य सरकार को विज्ञापन के नाम पर लाखों रुपये की हानि पहुँचाई गयी है। जिसके लिये माननीय उच्च न्यायालय में जनहित में याचिका दायर की जायेगी। दोषियों से वसूली के साथ साथ उत्तराखंड कर्मचारी आचरण नियमावली के अनुसार कार्यवाही करने की मांग की जायेगी।


















