हाईटेंशन लाइन बनी मौत का फंदा – WAOHR की पहल पर मानवाधिकार आयोग ने दर्ज किया मामला
हाईटेंशन लाइन बनी मौत का फंदा – WAOHR की पहल पर मानवाधिकार आयोग ने दर्ज किया मामला
“नागरिकों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”– संदीप सिंह(WAOHR)
मुरादाबाद/लखनऊ, 27 फरवरी 2026।
मुरादाबाद के बुद्धि विहार क्षेत्र में आवासीय मकानों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइन एक 12 वर्षीय बालक के लिए मौत का कारण बन गई। इस हृदयविदारक घटना ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, लंबे समय से रिहायशी क्षेत्र के ऊपर से गुजर रही इस लाइन को लेकर आशंका व्यक्त की जाती रही थी, किंतु प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था World Accreditation of Human Rights (WAOHR) ने निर्णायक हस्तक्षेप करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC), लखनऊ में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए डायरी संख्या 1446/IN/2026 तथा केस संख्या 3648/24/56/2026 आवंटित कर मामला पंजीकृत कर लिया है। इससे स्पष्ट है कि प्रकरण अब विधिक परीक्षण के दायरे में है।

WAOHR के मुरादाबाद मंडल डायरेक्टर संदीप सिंह ने कहा कि रिहायशी क्षेत्र में बच्चों के सिर के ऊपर से हाईटेंशन लाइन का गुजरना “दुर्घटना” नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। संस्था ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 — जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार — का गंभीर उल्लंघन बताया है।
WAOHR ने अपने प्रार्थना-पत्र में पूर्ण दायित्व सिद्धांत (Absolute Liability) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य एवं विद्युत विभाग खतरनाक गतिविधियों से उत्पन्न किसी भी क्षति या मृत्यु के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी हैं और इसे महज़ “दुर्घटना” बताकर दायित्व से मुक्त नहीं हो सकते।
WAOHR की प्रमुख मांगें:
पीड़ित परिवार को न्यूनतम ₹10,00,000 का अंतरिम प्रतिकर
संबंधित विद्युत अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई
रिहायशी क्षेत्रों में गुजर रही हाईटेंशन लाइनों का विशेष सर्वे कर तत्काल शिफ्टिंग/सुरक्षा उपाय
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु बाध्यकारी दिशानिर्देश
WAOHR के जिला पब्लिक रिलेशनशिप ऑफिसर जरीस मालिक ने कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के रिहायशी इलाकों में मौजूद संभावित खतरे का संकेत है। संस्था का कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकेगी।
इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या विकास और विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था नागरिकों की सुरक्षा से ऊपर रखी जा सकती है?
अब प्रदेशभर की निगाहें राज्य मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।























