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“राजनीतिक पहलवानों” और उनके समर्थकों की बिना रिंग वाली कुश्ती-फेसबुकिया जंग:का अंत-पोस्ट-शिकायत-अपील-डिलीट,और अब भाईचारा ओके!”

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फेसबुकिया जंग: पोस्ट-शिकायत-अपील-डिलीट, और अब भाईचारा ओके!”

नजीबाबाद
राजनीति के अखाड़े में तलवारें, भाले, लाठी-डंडे नहीं… बल्कि फेसबुक पोस्ट और कमेंट बॉक्स की गोलियां चल रही थीं। पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया पर “राजनीतिक पहलवानों” और उनके समर्थकों की बिना रिंग वाली कुश्ती चल रही थी।

मामला इतना गरमा गया कि शिकायत सीधा थाने से सीओ ऑफिस तक पहुंच गई। लेकिन शुक्र है, नेताओं को याद आ गया कि अब चुनावी मौसम है, और भाईचारा वाली इमेज ज्यादा वोट खींचती है।

विधायक जी की राजनितिक ,रणनीतिक की शांति की घंटी घनघन्ना उठी🔔

माननीय विधायक हाजी तसलीम अहमद ने अपने फेसबूकया चाहने वालों को समझाया की

“भाई लोगो, पोस्ट-डिलीट करो, गाली-गलौज छोड़ो, और थोड़ा संस्कारी बन जाओ। राजनीति में ‘लाइक-शेयर’ से ज्यादा जरूरी है वोट।”

इक़बाल हिन्दुस्तानी और आसिद नजीबाबाद की मध्यस्थता रंग लाई
और खुर्शीद मंसूरी से बोले

“भाई, पोस्ट हटा दो, शिकायत वापस ले लो। वरना नजीबाबाद में फेसबुकिया महाभारत का दूसरा सीजन शुरू हो जाएगा।”

वही समाजसेवी लोगो के दिलो पर राज करने वाले खुर्शीद मंसूरी ने भी मौके की नजाकत को देखते हुए यू-टर्न लिया और आने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आखिरकार खुर्शीद मंसूरी भी नरम पड़े। और बोले –

“गलती हमारी थी, पोस्ट भूलवश हो गई थी। अब डिलीट समझो, शिकायत भी वापस समझो।”

और यूं, फेसबुक की जंग का अंत हुआ…
“डिलीट बटन दबाकर।”
वही नगर के कुछ लोगो ने व्यंग्य की चुटकी लेते हुए कहा कि: “नेता जी आपस में पोस्ट डिलीट कर लो, लेकिन हमारी बिजली, पानी, सड़क कब डाउनलोड होगी?”

सोशल मीडिया ने फिर साबित किया कि यहां झगड़े भी ‘एडिट’ और ‘डिलीट’ से सुलझ जाते हैं।

राजनीति अब सभाओं से ज्यादा टाइमलाइन पर तय हो रही है।

कुल मिला कर नतीजा ये निकला कि अब
नजीबाबाद की राजनीति में तलवारें नहीं, अब सिर्फ की-बोर्ड कीबोर्ड भिड़ते हैं।
और जनता सोच रही है “काश! हमारी समस्याएं भी इसी तरह एक क्लिक में डिलीट हो जातीं।”

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