वाराणसी/उत्तरप्रदेश

रंगभरी एकादशी: महादेव गौरा संग छह घंटे करेंगे नगर भ्रमण, अघोर रूप में पहुंचे ससुराल; गूंजे लोकगीत

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काशी की जीवंत लोकपरंपरा में रंगभरी एकादशी का पर्व पर शुक्रवार को शिव-गौरा के दांपत्य मिलन का अनुपम उत्सव बनेगा। काशीवासी बाबा के गौना के साक्षी होंगे। बाबा-गौरा की चल प्रतिमाएं छह घंटे नगर भ्रमण कर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेंगी।

शिव और गौरा बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में विराजेंगे। यहां काशीवासी बाबा संग अबीर-गुलाल से होली खेलेंगे। बाबा के गौना उत्सव के क्रम में बृहस्पतिवार को श्रीकाशी विश्वनाथ अघोर रूप में ससुराल गौरा सदनिका (टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास) पहुंचे। बाबा रुद्राक्ष और करुंगली माला धारण कर अघोर स्वरूप में गणों संग पूर्व महंत के आवास पहुंचे।

गौरा के गौने का उत्सव 24 फरवरी से हल्दी की रस्म से शुरू है, जो शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर माता गौरा और बाबा की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा के साथ संपन्न होगा। बृहस्पतिवार को मुख्य आकर्षण महादेव का अघोर स्वरूप था।

तैयारी पूरी

रुद्राक्ष और करुंगली की माला धारण कर बाबा की चल प्रतिमा जब गौरा सदनिका पहुंची तो भक्तों ने भावविभोर होकर स्वागत किया। कुशा से निर्मित पवित्र मंडप में वेद मंत्रों के बीच महादेव को विराजमान कराया गया। पंचमेवा और विजया मिश्रित ठंडई का भोग लगा।

काशी के 51 प्रमुख मंदिरों के प्रतिनिधित्व में महंत लिंगिया शिव प्रसाद पांडेय ने महादेव और गणों की विधिवत आरती उतारी। उनके साथ पूर्व महंत कुलपति तिवारी के पुत्र व आयोजक वाचस्पति तिवारी ने परंपरानुसार विधिवत पूजन कराया। दोपहर से ही गौरा सदनिका पर पांच वैदिक ब्राह्मणों ने चार दिवसीय अनुष्ठान के क्रम में पूजन कराया।

आज शाम पांच बजे निकलेगी बाबा की पालकी यात्रा

आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि गौरा का मुख्य गौना संस्कार शुक्रवार को रंगभरी एकादशी पर संपन्न होगा। शाम को पांच बजे गौरा सदनिका पूर्व महंत आवास से बाबा और माता गौरा की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। सुबह माता गौरा, बाबा और प्रथमेश का विशेष पूजा होगी। भक्त दिनभर दर्शन करेंगे। शाम को पांच बजे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के लिए पालकी यात्रा निकाली जाएगी।

Sallauddin Ali

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