भाजपा संगठन में जल्द होगा बड़ा फेरबदल

नक़ी हैदर दानिश
14 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की पहली बड़ी चुनौती~~
आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश भाजपा संगठन को और अधिक मजबूत करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन के अंतर्गत गठित 98 जिलों में से शेष बचे 14 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को पूरा करना है। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के बाद प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया शुरू होगी।
सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में लंबित 14 जिलाध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। इसके बाद अगले महीने से प्रदेश स्तरीय संगठन में बदलाव को लेकर मंथन शुरू हो सकता है। इससे पहले नियुक्त किए गए 84 जिलाध्यक्षों को लेकर उठ रहे सवालों और कई जिलों में चल रही अंदरूनी कलह को संभालना भी नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
गौरतलब है कि प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडे द्वारा दो चरणों में 84 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान और सहमति न बनने के कारण 14 जिलों में नियुक्ति लंबित रह गई। इनमें प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है।
नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने परिचयात्मक दौरों के माध्यम से कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू कर दिया है। वे लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि आगामी संगठनात्मक फैसलों में कैडर आधारित और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में संगठनात्मक संतुलन और कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जिन 14 जिलों में अभी तक जिलाध्यक्षों की नियुक्ति नहीं हो पाई है, उनमें अंबेडकरनगर, गोंडा, अयोध्या जिला व महानगर, वाराणसी जिला, चंदौली, मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, लखीमपुर, पीलीभीत, शामली, सहारनपुर और अमरोहा शामिल हैं। इन जिलों में क्षेत्रीय विधायकों और दावेदारों के बीच मतभेद के चलते सहमति नहीं बन सकी थी। जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया में जातीय समीकरणों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
नए पैनल पर होगा फैसला
सूत्रों का कहना है कि शेष 14 जिलों के लिए संबंधित क्षेत्रीय संगठनों से तीन-तीन नामों के नए पैनल मांगे गए हैं। पुराने पैनल होने के बावजूद नए प्रदेश अध्यक्ष ने नए सिरे से नाम भेजने को कहा है। इन नामों पर अंतिम निर्णय के बाद जिलाध्यक्षों की घोषणा की जाएगी, जिसके साथ ही प्रदेश और क्षेत्रीय संगठन में व्यापक फेरबदल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।





