फ़ातिमा ज़हरा रिसालत और इमामत को जोड़ने की एक कड़ी हैं – अबूज़र अब्बास शरीफ मंज़िल में अय्यामे फातमीया की मजलिसों का हुआ समापन

इन्तिजार अहमद खान
इटावा। रसूल अल्लाह की इकलौती मज़लूमा बेटी फ़ातिमा ज़हरा की शहादत पर राहत अक़ील शक्कन की ओर से शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा इटावा में चल रहे पांच दिवसीय अय्यामे फातमीया के खमसे की मजलिसों का समापन हो गया।
अलविदाई मजलिस में तक़रीर करते हुए मौलाना अबूज़र अब्बास खान इमामे जुमा शिकोहाबाद जनपद फीरोजाबाद ने कहा मज़लिसों में आने के लिए कोई पाबंदी नहीं है सभी धर्मों के लोग मज़लिसों में आते हैं। रसूल की मज़लूमा बेटी फ़ातिमा ज़हरा की शहादत पर पूरे देश मे मज़लिसों का सिलसिला जारी है। रसूल ने फरमाया है कि अगर कायनात के लोगों के दिलों में अली की मोहब्बत होती तो अल्लाह को दोजख बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। अल्लाह ने नबी जनाबे ईसा की मां मरियम से बड़ा मर्तबा इमाम हुसैन की मां फ़ातिमा ज़हरा को दिया। फ़ातिमा ज़हरा रिसालत और इमामत को जोड़ने की एक मजबूत कड़ी हैं। मौलाना अबूज़र अब्बास ने कहा फ़ातिमा ज़हरा के पास इल्म का खजाना था उन्होंने एक बार अली से कहा आप जो चाहो मुझसे पूछ सकते हो। यह फ़ातिमा ज़हरा का घर था जब मौत कब्ज करने वाले फरिश्ते को भी घर मे आने के लिए इजाजत लेनी पड़ी। रसूल की इसी बेटी के घर जालिमों ने आग लगा दी और फ़ातिमा ज़हरा पर बेपनाह जुल्म ढाए इतना ही नहीं जब फ़ातिमा ज़हरा दरबार मे अपना हक लेने गईं तो उन्हें उनका हक भी नहीं दिया गया। तसलीम रज़ा, सलीम रज़ा, ज़हूर नक़वी, सफीर हैदर ने सोजख्वानी, राहिल सग़ीर ने नोहा ख्वानी की और अश्शू रिज़वी, मोहम्मद सादिक ने कलाम पेश किए। मजलिस में मौलाना अनवारुल हसन जैदी, अल्हाज कमर अब्बास नकवी करबलाई, शावेज़ नक़वी, तनवीर हसन, इमरान वारसी, आदिल अख्तर गुडडू, अयाज हुसैन, ताजदार हुसैन, राहत हुसैन रिज़वी, अली साबिर, अख्तर अब्बास, जहीर अब्बास, मुशीर हैदर, इबाद रिज़वी, शौजब रिज़वी, शाद अली हसन, मो. अहमद, शारिक सग़ीर शानू, मो. जुनैद, मो. जावेद, शाहिद, कलीम वारसी, अदनान जाफरी, सैफू, फ़ातिक, हम्माद, सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।





