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कांग्रेस की कार्यसमिति घोषित,ढाक के तीन पात

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कांग्रेस की कार्यसमिति घोषित, ढाक के तीन पात
रितेश सिन्हा
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक

दिल्ली- पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी के जयंती के श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद सीडब्लूसी की घोषणा हो गई। कुल 84 लोगों की सूची में सीडब्लूसी के 30 सदस्य बनाए गए हैं। इसमें पूर्व अध्यक्ष होने के नाते सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जगह दी गई है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री को सम्मानित करते हुए डाक्टर मनमोहन सिंह को भी इसमें जगह दी गई है। इस 39 सदस्यों की समिति में स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। कांग्रेस वर्किंग कमिटी को प्रियंका के वफादार और उनको प्रधानमंत्री का दावेदार बताने वाले तारिक अनवर भी शामिल हैं। राहुल गांधी का सार्वजनिक विरोध करने वाले नेताओं में तारिक के बाद आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक को भी कार्यसमिति में शामिल किया गया है। कार्यसमिति में अन्य प्रदेशों से शामिल होने वाले नेताओं में राजस्थान से सचिन पायलट, छत्तीसगढ़ से ताम्रध्वज साहु, मध्यप्रदेश से दिग्विजय सिंह और कमलेश पटेल को जगह दी गई है। इनके प्रदेशों में जल्द ही विधानसभा चुनावों की घोषणा होनी बाकी है।
मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले शशि थरूर भी वर्किंग कमिटी का हिस्सा बनाए गए हैं। वहीं अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने में माहिर खड़गे ने दलित नेता सुशील कुमार शिंदे का नाम 84 लोगों की सूची से ही हटा दिया है। कर्नाटक में मुख्यमंत्री चयन को लेकर जो रस्साकसी थी, शिंदे उसका समाधान निकालने में कामयाब रहे थे। खड़गे की इच्छा के विरोध के बावजूद समाधान निकालते हुए सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। एआईसीसी में राहुल की पसंद बने कोषाध्यक्ष पवन कुमार बंसल को खड़गे टीम ने अपमानित करने में कोई कोर-कसर नहीं रखी। उन्हें 39 सदस्यीय टीम से बाहर रखते हुए स्थायी आमंत्रित सदस्यों में शामिल किया गया। आपको बता दें पवन कुमार बंसल ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए बकायदा फार्म भी खरीदा था।
कांग्रेस द्वारा रायपुर के चिंतन शिविर में जो प्रस्ताव पारित संगठन के तौर पर पारित किए गए थे, उन्हीं का मजाक उड़ाती है वर्किंग कमिटी की नई सूची। इसमें 5 साल से अधिक समय तक किसी एक पद पर कोई नेता नहीं रहेगा। चिंतन शिविर के नाम कई सौ करोड़ फूंक कर की गई चिंता से कुछ भी सबक नहीं लिया गया। इस 84 सूची में 18 स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाए गए हैं। इनमें 14 वैसे नेता शामिल हैं जिन्हें प्रभारी बनाकर अन्य राज्यों में कमान देते हुए कार्यसमिति में टिकाया गया है।
युवाओं को जिम्मेदारी के नाम पर गौरव गोगई को शामिल किया गया जो पहले भी वर्किंग कमिटी का हिस्सा थे। उनके अलावा सचिन पायलट, सुप्रिया श्रीनेत, कन्हैया कुमार, दीपेंद्र हुड्डा, मीनाक्षी नटराजन, सचिन राव, अलका लांबा जैसे युवा नेताओं को शामिल किया गया है। 138 सालों से वर्किंग कमिटी कांग्रेस का निर्धारण और संचालन करती रही है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी में प्रियंका के वफादारों में तारिक अनवर के अलावा गु्रप 23 के मुकुल वासनिक, आनंद शर्मा और मनीष तिवारी, कुमारी शैलजा, मोहन प्रकाश, अशोक चव्हाण को भी जगह दी गई है।
स्थायी आमंत्रित सदस्यों में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, एआईसीसी के कोषाध्यक्ष पवन कुमार बंसल, कई प्रदेशों में कांग्रेस भट्ठा बैठा चुके मोहन प्रकाश, हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का दावा ठोकने वाली प्रतिभा सिंह, के राजू, केरल से रमेश चेनिन्नथाला, बीके हरिप्रसाद, प्रतिभा सिंह, मनीष तिवारी, दीपेंद्र हुड्डा, के राजू, मीनाक्षी नटराजन, सुदीप रॉय बर्मन समेत कई अन्य नेताओं को शामिल किया गया है। विशेष आमंत्रित सदस्यों में के पल्लम राजू, पवन खेड़ा, गणेश गोदियाल, यशोमति ठाकुर, सुप्रिया श्रीनेत, परिणिति शिंदे, अलका लांबा आदि सदस्यों का नाम शामिल किया गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस का बेड़ा गर्क करने वाले माणिक राव ठाकरे को भी शामिल किया गया है। उत्तराखंड में कांग्रेस को चौपट करने वाले देवेंद्र यादव को भी महासचिव का रूतबा दिया गया है। मनीष चतरथ भी महासचिव बनाए गए हैं। विशेष आमंत्रित नेताओं में महाराष्ट्र से यशोमति ठाकोर और परनीति शिंदे, राजस्थान कोटे से पवन खेड़ा भी इस सूची में शामिल किए गए हैं। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष वीवी श्रीनिवास, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष नेता डिसूजा, सेवा दल के लालजी देसाई को भी पदेन सदस्यों का दर्जा दिया गया है। कश्मीर कोटे से गुलाम नबी आजाद के शागिर्द रहे ए मीर को जगह दी गई है। अपनी हनक दिखाते हुए खड़गे ने सैयद नासिर अहमद को वर्किंग कमिटी का हिस्सा बनाया है। प्रदेशों के इंचार्ज के नाम पर डाक्टर ए चेला कुमार, भक्तचरण दास, डाक्टर अजय कुमार, हरीश चौधरी और राजीव शुक्ला को भी जगह दी गई है। चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कोटे से शामिल किया गया है।
कांग्रेस की इस नई वर्किंग कमिटी को बनाने को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे पर काफी दवाब था। पिछले 9 महीनों से खड़गे इसे टालते आ रहे हैं। इसमें ऐसा कोई नया नहीं है जिससे कांग्रेस में कोई धार दिखे या फिर बड़ा परिवर्तन दिखाई दे। इसमें ऐसे नेताओं के नाम अधिक शामिल हैं जिन्होंने कांग्रेस को अच्छा खासा नुकसान पहुंचाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की जनता में बढ़ती पकड़ को देखते हुए पहली नजर में ये सूची निराश करती है। रायपुर के चिंतन शिविर की घोषणाओं से ये कहीं भी मेल नहीं खाती। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को इस सूची से खासी निराशा हुई है। यूपी के प्रदेश अध्यक्ष पद से खाबरी को हटाते हुए अजय राय को नया अध्यक्ष बनाने के बाद कांग्रेस का थिंक टैंक लगभग शून्य और संवेदनहीन दिखाई दे रहा है।
झारखंड, बिहार और यूपी में एक ही जाति विशेष को प्रदेश अध्यक्ष को बनाकर किस सामाजिक ताने-बाने को जोड़ने की कवायद की जा रही है, ये समझ से परे है। कांग्रेस को जानने वाले इसे केवल खानापूर्ति बताते हुए ढाक के तीन पात की कविता को चरितार्थ कर रहे हैं। कांग्रेस में अच्छे काम करने वालों को कैसी सजा दी जाती है, ताजा मामला जयप्रकाश अग्रवाल का है जिन्हें मध्यप्रदेश में गुटबाजी को दूर करने में सफलता मिली थी, उन्हें एक झटके में बाहर कर दिया। इसको लेकर कांग्रेसियों में खासा रोष है। अपने संगठन क्षमता के बूते 1991 में वे एकलौते सांसद दिल्ली से जीत कर आए थे। उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच में बेहद लोकप्रिय माना जाता था, जो उनके आड़े आ गई। अचानक हुई इस फेरबदल के कई दूरगामी परिणाम आने वाले समय में दिखेंगे जिसके नफा-नुकसान आकलन भी किया जाएगा।

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