अंतरराष्ट्रीय
ईरान को नया सुप्रीम लीडर खामनेई के बेटे मोजतबा खामनेई बने

जिन्हें लग रहा है कि सैयद अली खामनेई की शहादत से ईरान फतह हो जाएगा, वो गलतफहमी दूर कर लें। ईरान ने 47 साल में जो विचारधारा तैयार की है, उसमें शरीर के कोई मायने ही नहीं हैं। शरीर तो मिट्टी है, मिट्टी में ही मिलना है, विचारधारा अमर है। यही कारण है कि सैयद अली खामनेई बजाय सरेंडर करने के मुकाबला करने का रास्ता चुनते हैं, लंबा जीने के बजाय शहादत का रास्ता चुनते हैं। वो अमर हो गए। दुनिया याद रखेगी कि 86 वर्ष का बुजुर्ग ने बजाय सरेंडर के शहादत का रास्ता चुना था। ईरान को नया सुप्रीम लीडर मुबारक हो।























