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CJI Ramana says more judges appointment on urgent basis know the details lak

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नई दिल्ली. देश के विभिन्न कोर्टों (Court) में जजों (Judges) की भारी कमी है. पीआरएस के मुताबिक देश की निचली अदालतों में 2020 तक स्वीकृत जजों की संख्या में 21 प्रतिशत की कमी है. दूसरी ओर निचली अदालतों में 3.6 करोड़ केस लंबित है. इतनी बड़ी संख्या में लंबित केस (Pending cases) और जजों की भारी कमी न्याय के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है. इसलिए पिछले कुछ सालों से जजों की कमी देश में बड़ा मुद्दा है. अब देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमणा (NV Ramana) ने दो टूक कहा है कि देश की अदालतों में तत्काल आधार पर जजों की जरूरत है.

चीफ जस्टिस एन वी रमणा ने कहा है कि न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिर्फ फंड की व्यवस्था करना ही पर्याप्त नहीं है. इससे न्यूनतम मानक को भी पूरा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि जब तक जजों की तत्काल आधार पर नियुक्ति नहीं होती न्यायिक प्रक्रिया में सुधार नहीं हो सकता. रमणा बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे. इस समारोह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और देश में कई हाईकोर्ट के जज भी मौजूद थे.

न्यायिक इंफ्रस्ट्रक्चर में तत्काल सुधार की जरूरत

बौद्धिक संपत्ति अधिकार विषय पर आयोजित एक सेमिनार में बोलते हुए चीफ जस्टिस एन वी रमणा ने कहा, केंद्र और राज्य में केंद्र सरकार द्वारा वैधानिक प्राधिकरण के गठन का प्रयास दुर्भाग्य से फलीभूत होता हुआ नहीं दिख रहा है. इसलिए न्यायिक इंफ्रस्ट्रक्चर में तत्काल सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से हम न्यायिक क्षेत्र में बुनियादी न्यूनतम मानकों को भी पूरा नहीं कर रहे हैं. चीफ जस्टिस का पद संभालने के बाद से मेरा यह प्रयास रहा है कि न्यायिक इंफ्रस्ट्रक्चर में सुधार और समन्वय के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित किया जाए. इसके लिए ज्यादा फंड काम नहीं कर सकता है. हमारे सामने चुनौती इस बात की है कि उलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल कैसे किया जाए. मैं केंद्र और राज्य में वैधानिक प्राधिकरण के गठन के लिए सरकार से गुहार लगा रहा हूं लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका है.

न्यायिक व्यवस्था में प्रशिक्षण की कमी चुनौती

चीफ जस्टिस रमणा ने न्यायिक व्यवस्था में लगातार प्रशिक्षण और कौशल परिष्करण पर जोर दिया. भारतीय न्याय प्रणाली के सामने प्रशिक्षण की कमी बहुत बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार का क्षेत्र हाई कोर्ट में ऐसे समय में आया है जब पहले से ही कोर्ट केस के बोझ तले दबा हुआ है. हालांकि, केस का बोझ हमें आवश्यक प्रणालियों को स्थापित करने और इस मौके पर आगे बढ़ने से नहीं रोकेगा. चीफ जस्टिस ने कहा, यही वह क्षण है जब हम हाई कोर्ट में पर्याप्त क्षमता का निर्माण कर सकते है ताकि बौद्धिक संपदा मुकदमे को कुशलतापूर्वक और सुचारू रूप से संचालित किया जा सके.

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