बिहार के कटिहार में गंगा- कोशी और महानंदा नदी के बढ़ते-घटते जलस्तर पर, नदियों की सीमावर्ती गांव-गांव की धरती दरकने लगी..एकड़ की एकड़ किसानों को भूमि, नदियों के उफान पर पानी मे समाने लगी सरकारी तंत्र की कामयाब कोशिस को ध्वस्त कर रही है नदियाँ ने इलाके में खलबली मचा रही है। सरकार की लचर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे लोग डूब – कट रहे गांव के गांव में मची है त्राहिमाम.. प्रशासन की व्यवस्था पर सरकार से पूछ रहे है सवाल कुर्सेला बरारी और अमदाबाद प्रखंड में मचा है कटाव से हड़कंप।
कटिहार डीएम उदयन मिश्रा ने कहा – बाढ़ नियंत्रण विभाग और प्रशासन की पूरी टीम .. प्रभावित तीन प्रखंडो के क्षेत्रों में ..तटबन्धों को बचाने में जुटी पड़ी है .. किसानों के विलीन होते खेतो को आंकलन कृषि विभाग की टीम कर रही है। आपदा के अनुसार..किसानों को क्षतिपूर्ति – मुआवजा जरूर दिया जाएगा।
वहीं प्रशासन की चरमरायी व्यवस्था पर स्थानीय किसानों ने कहा –
एक वर्ष पूर्व इलाके को बचाने के लिए 1 करोड़ 56 लाख की योजना से ..महज 56 बोरा मिट्टी का कार्य बाढ़ निरोधक कार्य बाढ़ नियंत्रण विभाग से कराया गया था स्थिति को देखने ना तो जनप्रतिनिधि और ना ही प्रशासन की टीम आ रही है।


















