जनवाणी की खबर का मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान- अकबरपुर आंवला की बदहाल सड़कों पर डॉ तारीक़ जकी की शिकायत के बाद डीएम बिजनौर को नोटिस

अकबरपुर आंवला की बदहाल सड़कों पर डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत के बाद डीएम बिजनौर को नोटिस
जनवाणी की खबर का मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
अकबरपुर आंवला की बदहाल सड़कों पर डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत के बाद डीएम बिजनौर को नोटिस
उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने 6 नवंबर तक जांच रिपोर्ट तलब की
नजीबाबाद/बिजनौर। ग्राम पंचायत अकबरपुर आंवला में बदहाल सड़कों, जलभराव एवं नालियों की समस्या को लेकर दैनिक जनवाणी में प्रमुखता से प्रकाशित समाचार का मानवाधिकार के दृष्टिकोण से संज्ञान लेते हुए World Accreditation of Human Rights (WAOHR) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. तारिक़ ज़की ने उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी बिजनौर को नोटिस जारी कर मामले की जांच कर रिपोर्ट तलब की है।


आयोग के अभिलेख के अनुसार शिकायत Diary No. 7005/IN/2026 के तहत पंजीकृत हुई है, जबकि Case/File No. 19140/24/17/2026 है। शिकायत 29 अगस्त 2026 को दर्ज की गई थी और आयोग द्वारा 1 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी बिजनौर के नाम नोटिस जारी किया गया।
आयोग के आदेश में जिलाधिकारी बिजनौर को मामले की आवश्यक जांच करने तथा शिकायतकर्ता को जांच में शामिल/associate करते हुए आयोग को 6 नवंबर 2026 तक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मामले को 10 नवंबर 2026 को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाना निर्धारित किया गया है।
दैनिक जनवाणी में प्रकाशित समाचार में अकबरपुर आंवला के ग्रामीणों की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। ग्रामीणों के अनुसार गांव के कई प्रमुख रास्ते लंबे समय से जर्जर हैं। बरसात के दौरान इन रास्तों पर कीचड़ और पानी भरने से आवागमन मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों को भी जलभराव और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि तथा उसके उपयोग पर भी सवाल उठाते हुए पिछले वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की जांच की मांग की थी।
डॉ. तारिक़ ज़की द्वारा आयोग को भेजी गई शिकायत में मांग की गई कि पिछले पांच वर्षों में ग्राम पंचायत को प्राप्त विकास धनराशि, स्वीकृत कार्यों, भुगतान, माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर, निर्माण की गुणवत्ता तथा मौके पर कराए गए कार्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वित्तीय व तकनीकी जांच कराई जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि जांच के दौरान सरकारी धन के दुरुपयोग, घटिया निर्माण अथवा अन्य अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं विधिक कार्रवाई तथा सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
मानवाधिकार आयोग द्वारा मामले में जिलाधिकारी बिजनौर को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब अकबरपुर आंवला के ग्रामीणों की नजर स्थलीय जांच और आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर है। आयोग की कार्रवाई से यह मामला अब स्थानीय समस्या से आगे बढ़कर ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन, बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़े सार्वजनिक हित के मुद्दे के रूप में सामने आया है।






