वाराणसी/उत्तरप्रदेश

आईयूसीटीई वाराणसी में ‘द एडटेक कनेक्ट एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ’ अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

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शैक्षिक प्रौद्योगिकी में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देगा ‘एडटेक कनेक्ट’ कार्यक्रम ||

दस देशों के 24 शिक्षक आईयूसीटीई के सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल ||

डिजिटल तकनीक से शिक्षा को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है – डॉ.अनिल कोठारी ||

वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच ज्ञान साझेदारी को मजबूत करेगा ‘द एडटेक कनेक्ट’ कार्यक्रम ||

वाराणसी :- द एडटेक कनेक्ट एम्पावरिंग द ग्लोबल साउथ विषय पर सात दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) वाराणसी परिसर में हुआ | यह अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के ग्लोबल साउथ (साउथ–साउथ कोऑपरेशन) के अंतर्गत इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है | उद्घाटन सत्र की शुरुआत मंगलाचरण,दीप प्रज्वलन,माँ सरस्वती की प्रतिमा और महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने से हुई इसके उपरांत प्रतिनिधियों के समक्ष संस्थान के पिछले 11 वर्षों के विकास की झलकियों का वीडियो प्रस्तुत किया गया | इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच शैक्षिक प्रौद्योगिकी (EdTech) के क्षेत्र में सहयोग,नवाचार और ज्ञान-साझेदारी को प्रोत्साहित करना है |

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.शिव कुमार शर्मा राष्ट्रीय संगठन मंत्री,विज्ञान भारती,विशिष्ट अतिथि डॉ.अनिल कोठारी, महानिदेशक,एमपीसीएसटी,भोपाल तथा विशेष अतिथि प्रो.बी.के.सिंह आईआईआई टीडीएम जबलपुर रहे जबकि उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो.प्रेम नारायण सिंह निदेशक आईयूसीटीई वाराणसी ने की | आईयूसीटीई के डीन (शैक्षणिक एवं शोध),प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने सभी गणमान्य अतिथियों और विश्वभर से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया साथ ही कार्यक्रम के उद्देश्यों और उसकी संरचना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसकी महत्ता को रेखांकित किया |

मुख्य अतिथि डॉ.शिव कुमार शर्मा राष्ट्रीय संगठन मंत्री विज्ञान भारती ने कहा कि शिक्षक की मुख्य भूमिका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी को समझना है उन्होंने कहा कि केवल तकनीक के माध्यम से सामग्री प्रदान करना एकतरफा प्रक्रिया है जो प्रभावी शिक्षण के लिए पर्याप्त नहीं है | उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक को विद्यार्थियों के मन और भावनाओं को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सार्थक बनाना चाहिए |

विशिष्ट अतिथि डॉ.अनिल कोठारी महानिदेशक एमपीसीएसटी भोपाल ने अपने संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण शिक्षण प्रक्रिया में डिजिटल तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डिजिटल साधनों के माध्यम से शिक्षा को अधिक प्रभावी, सुलभ और व्यापक बनाया जा सकता है | विशेष अतिथि प्रो.बी.के.सिंह,आईआईआई टीडीएम जबलपुर ने अपने संबोधन में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा और उसके महत्व पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक सद्भाव,सहयोग और मानवता की भावना को सुदृढ़ करने के लिए यह विचार अत्यंत प्रासंगिक है |

प्रो.प्रेम नारायण सिंह निदेशक आईयूसीटीई वाराणसी ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का स्वागत किया | उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नैतिकता और आचरण के मूल्यों का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है | विश्व आज एक जटिल और संवेदनशील दौर से गुजर रहा है ऐसे में समाज में नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है |

दूसरे सत्र में प्रो.आशीष श्रीवास्तव डीन (शैक्षणिक एवं शोध),आईयूसीटीई वाराणसी ने प्रथम शैक्षणिक सत्र में एडटेक परिदृश्य,डिजिटल दक्षता,डेटा प्रबंधन उपकरणों तथा गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण की डिजिटल विधियों पर विस्तार से चर्चा की | साथ ही उन्होंने यूनिवर्सल डिज़ाइन फॉर लर्निंग (UDL), सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम तथा डिजिटल युग में सुगम्यता मानकों के महत्व पर प्रकाश डाला | तीसरे सत्र में डॉ. राजा पाठक सहायक आचार्य आईयूसीटीई ने “डिजिटल पेडागॉजी एंड फाउंडेशनल फ्रेमवर्क्स” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए | उन्होंने डिजिटल युग में प्रभावी शिक्षण के लिए नवीन शैक्षणिक ढाँचों और तकनीक आधारित शिक्षण पद्धतियों के महत्व पर प्रकाश डाला ^

इस कार्यक्रम में श्रीलंका,कम्बोडिया, घाना,किर्गिस्तान,मॉरीशस, थाईलैंड, युगांडा,उज्बेकिस्तान,ताजिकिस्तान और इथियोपिया दस देशों के 24 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं |

कार्यक्रम के निदेशक प्रो.आशीष श्रीवास्तव,संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध),आईयूसीटीई हैं जबकि इसका समन्वयन डॉ.राजा पाठक सहायक आचार्य आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है | सह-समन्वयक के रूप में डॉ.सुनील कुमार त्रिपाठी,सहायक आचार्य आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं | केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान कर रहे हैं ||

Sallauddin Ali

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