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धामपुर में ज़िंदगी से खिलवाड़: अवैध थ्री-व्हीलर और ई-रिक्शा बन गए हैं मौत की सवारी-प्रशासन मौन-डॉ तारिक़ ज़की/वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स

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धामपुर में ज़िंदगी से खिलवाड़: अवैध थ्री-व्हीलर और ई-रिक्शा बन गए हैं मौत की सवारी – प्रशासन मौन-डॉ तारिक़ ज़की/वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स

धामपुर – वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी डॉ तारिक ज़की ने नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन बताते हुए मानवाधिकार आयोग में अपील दायर कर नागरिको की सुरक्षा की लगाई गुहार ।

धामपुर (जनपद बिजनौर) व आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों बिना लाइसेंस, पंजीकरण, बीमा और फिटनेस वाले थ्री-व्हीलर, ऑटो व ई-रिक्शा बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनकी तकनीकी हालत अत्यंत खराब है – ब्रेक फेल, सिग्नल अनुपस्थित, ओवरलोडिंग आम बात बन चुकी है। इनमें अधिकांश चालक अयोग्य हैं और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों की जान खतरे में डालकर ओवरलोडिंग कर रहे हैं।दैनिक जनवाणी के 13/05/2025 के अंक में प्रकाशित समाचार “ज़िन्दगी से खिलवाड़ ,धामपुर मे दौड़ रही मौत की सवारी ” समाचार का संज्ञान लेते हुए सामाजिक/मानवाधिकार/वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी डॉ तारिक ज़की ने इसको सीधे-सीधे नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन बताते हुए कहा कि ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की चुप्पी इस गम्भीर मुद्दे को और भी संदेहास्पद बनाती है।

डॉ ज़की ने कहा कि वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स संस्था इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करता है और उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग मे शिकायती अपील दायर कर निम्नलिखित माँगो की अपील करता है:

  1. धामपुर क्षेत्र में चल रहे अवैध वाहनों की तत्काल जांच कराई जाए।
  2. बिना वैध दस्तावेज, बीमा व फिटनेस के वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
  3. ओवरलोडिंग और स्कूली बच्चों की जान को खतरे में डालने वालों पर दण्डात्मक कार्यवाही की जाए।
  4. ट्रैफिक पुलिस व परिवहन अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।
  5. एक स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित कर इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसे मानवाधिकार उल्लंघन की पुनरावृत्ति न हो।

राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी डॉ. तारिक ज़की ने कहा कि यह मामला केवल ट्रैफिक व्यवस्था का नहीं, जनसुरक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़ा एक मानवाधिकार संकट है। यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रशासन की घोर लापरवाही का उदाहरण बन जाएगा।

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