अभी और खुलेगी रहस्य की परतें द्रोणा सागर में,पुरातत्व विभाग

काशीपुर /उत्तराखंड (रिजवान अहसन),,, काशीपुर में बाजपुर रोड पर स्थित गुप्त काल के गोविषाण टीले में पुरातत्व विभाग की ओर से फिर से खोदाई शुरू कर दी गई है। इस दौरान कुछ दीवार और अन्य अवशेष मिले। विशेषज्ञ इन दीवारों के गुप्तकालीन होने की संभावना जता रहे हैं। अभी कुछ और महत्वपूर्ण अवशेष मिलने की उम्मीद है।द्रोणा सागर से सटे जंगल में गुप्त काल के किले और अन्य ऐतिहासिक स्थान दबे होने की संभावना को देखते हुए सबसे पहले 1963-64 में खोदाई की गई थी। तब गुप्त काल के जमाने का किला निकाला था। 2004-05 में भी खोदाई कराई थी जिसमें कुछ सिक्के और मूर्तियां आदि मिली थीं। अवशेषों और मूर्तियों को मूर्तियों को संग्रहालय में रखा गया है।
इस समय एक बार फिर खोदाई शुरू हुई है जिसमें तीन से चार अन्य दीवारें सामने आई हैं। विभाग के सूत्रों के अनुसार यह दीवारें गुप्त काल की हैं और ज्यादा अवशेष मिलने की संभावनाओं को देखते हुए विभाग के कुछ विशेषज्ञ काशीपुर पहुंच गए हैं। मध्य प्रदेश से आए विशेषज्ञ और ऐतिहासिक स्थलों की खोदाई करने वाले मजदूर काम पर लगे हैं। अभी इस टीले से इतिहास का बहुत कुछ खजाना मिलने की संभावना है।
खोदाई अभी जारी है, सोमवार को निरीक्षण करने के बाद ही पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि यहां और क्या-क्या ऐतिहासिक स्थल होने की संभावना है। फिलहाल जो ढांचा मिला है वह गुप्तकाल का ही प्रतीत हो रहा है।


















