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संचारी रोग के प्रसार के लिए अन्य कारकों के साथ-साथ चूहा एवं छछूंदर आदि भी उत्तरदायी-जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत

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बिजनोर– जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने जिले के समस्त कृषकों को जानकारी देते हुए बताया है कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान 2023 (तृतीय चरण) दिनांक 03 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2023 के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा चूहा एवं छछूंदर नियंत्रण के लिए व्यापक कार्यक्रम एवं अभियान संचालित किया जा रहा है संचारी रोग के प्रसार के लिए अन्य कारकों के साथ-साथ चूहा एवं छछूंदर आदि भी उत्तरदायी हैं। “स्क्रब टायफस” बीमारी चूहा एवं छछूंदर से फैलती है। इसलिए यह आवश्यक है कि इनकी रोकथाम हेतु आवासीय घरों एवं इसके आसपास के क्षेत्रों को चूहा एवं छछूंदर से मुक्त रहें। चूहों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए अन्न भंडारण पक्का कंक्रीट तथा धातु से बने पात्रों (बखारी) में करना चाहिए ताकि उनको भोज्य पदार्थ सुगमता से उपलब्ध न हो सके। चूहे अपना बिल झाड़ियों कुडों एवं मेड़ों आदि में स्थाई रूप से बनाते हैं। इसलिये खेतों का समय-समय पर निरीक्षण एवं साफ सफाई करके इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। चूहेदानी का प्रयोग करके उसमें आकर्षक चारा जैसे रोटी, डबल रोटी एवं बिस्कुट आदि रखकर चूहों को फंसा कर मार देने से इनकी संख्या नियंत्रित की जा सकती है घरों में ब्रोमोडियोलान 0.005 प्रतिशत के बने चारे की 10 ग्राम मात्रा प्रत्येक जिंदा बिल में रखने से चूहे उसको खाकर मर जाते हैं।

उन्होंने बताया कि चूहा बहुत चालाक प्राणी होता है इसको ध्यान मे रखते हुए छः दिवसीय योजना बनाकर इसको आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है –
प्रथम दिन – आवासीय घरों एवं आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण एवं बिलों को बंद करते हुए चिन्हित करें।

दूसरा दिन – निरीक्षण कर जो बिल बंद हो वहां चिन्ह मिटा दें जहां पर बिल खुले पाए जाएं वहां चिन्ह रहने दे। खुले बिल में एक भाग सरसों का तेल एवं 38 भाग भुने दाने का चारा बिन जहर मिलाएं बिल में रखें।

तीसरा दिन – बिलों का निरीक्षण कर बिना जहर का चारा पुनः रखें।
चौथे दिन – जिंक फास्फाइड 80 प्रतिशत की 10 ग्राम मात्रा को 10 ग्राम सरसों का तेल एवं 380 ग्राम भुने दाने में बनाए गए चारे को बिल में रखें।

पांचवे दिन – बिलों का निरीक्षण करें एवं मरे हुए चूहों को एकत्र कर घर से दूर जमीन में दफना दें।
छठे दिन- बिलों को पुनः बंद करें तथा अगले दिन यदि बिल खुले पाए जाएं तो उपरोक्त कार्यक्रम पुनः अपनाए।

उन्होंने विशेष कर चूहा नियंत्रण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां के बारे में बताया कि चूहा नियंत्रण के लिए रसायनों का प्रयोग करते समय हाथ में दस्ताने पहने। रसायनों को बच्चों एवं जानवरों की पहुंच से दूर रखें। दवा के प्रयोग के दौरान घर में रखी खाद्य सामग्री इत्यादि को अच्छी तरह से ढक दें। मरे हुए चूहे को घर से बाहर सावधानी पूर्वक मिट्टी में दबा दें।
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