नई दिल्ली

इंसानियत को गौरवान्वित करने वाली शख्सियत है खेकड़ा निवासी नगीन चन्द जैन

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इंसानियत को गौरवान्वित करने वाली शख्सियत है खेकड़ा निवासी नगीन चन्द जैन

  • बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सम्पर्क में आये नगीन चन्द जैन ने टैक्सटाईल इंडस्ट्री, समाजसेवी और धार्मिक कार्यो से समाज में बनायी एक अमिट पहचान
  • नगीन चन्द जैन ने त्रिलोक तीर्थ बड़ागांव में 1 करोड़ रूपये से अधिक की बेशकीमती जमीन दान कर रचा इतिहास, देश के बड़े दान-दाताओं में हुए शामिल

बागपत, उत्तर प्रदेश। विवेक जैन।
खेकड़ा कस्बे के रहने वाले प्रमुख उद्योगपति नगीन चन्द जैन अपने परिश्रम, समाजसेवी कार्यो, मधुर व मिलनसार व्यवहार और साम्प्रदायिक सौहार्द में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने के लिए जनपद बागपत को देशभर में गौरवान्वित कर रहे है। 8 जुलाई वर्ष 1942 को खेकड़ा में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी विशम्बर जैन के घर जन्में नगीन चन्द जैन बचपन से ही देशप्रेमी और बड़े धार्मिक प्रवृत्ति के है। इनके पिता एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की और वर्ष 1942 के आन्दोलन में जेल भी गये। विशम्बर जैन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े थे और 5 वर्ष की आयु में ही नगीन चन्द जैन को संघ की शाखा में ले जाना प्रारम्भ कर दिया था। नगीन चन्द जैन ने वर्ष 1958 में जैन इंटर कॉलिज खेकड़ा से 10वीं, वर्ष 1960 में एमएम इंटर कॉलिज खेकड़ा से 12वीं, वर्ष 1963 में जैन डिग्री कॉलिज बड़ौत से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरान्त यूनियन बैंक दिल्ली में कार्य किया। नगीन चन्द जैन ने बैंक की नौकरी बीच में ही छोड़कर कुछ वर्षो के अन्तराल पर टैक्सटाईल के क्षेत्र में कदम रखा और सफलता की नई ईबारत लिखी। खेकड़ा कस्बे की पहचान देश-दुनिया से कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होने देशभर के अनेकों तीर्थो पर कमरों का निर्माण कराया और त्रिलोक तीर्थ बड़ागांव को धार्मिक कार्यो हेतु 1 करोड़ रूपये कीमत की बेशकीमती जमीन दान में दी। जीवन भर साधु-संतो, जरूरतमंदो व बेजुबान जीवों की सेवा की और आज भी कर रहे है। जब तक टैक्सटाईल फैक्ट्री चलायी जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सेवा का अवसर प्रदान किया और उनके सुख-दुख के साथी बने। 81 वर्षीय नगीन चन्द जैन कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक विभिन्न धर्मो के लगभग सभी बड़े तीर्थ स्थलों के दर्शनों का सौभाग्य अर्जित कर चुके है, जिसमें अमरनाथ जी, शिखरजी, गिरनार जी, वैष्णो देवी, रामेश्वरम, तिरूपति बालाजी, बाहुबली जी जैसे सैंकड़ों बड़े तीर्थ शामिल है। इसके अलावा वे इंग्लैण्ड, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, स्वीटजरलैंड़, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, चीन, दुबई, आबूधाबी, कतर, शारजहां जैसे अनेकों देशों की यात्रा कर चुके है। वर्तमान में वे कई धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं से जुड़े है और समाज के हितों के लिए कार्य कर रहे है।

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