बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पूर्ण रूप से मुस्तैद : उपायुक्त अनीश यादव।

सुमरिन योगी
करनाल ( हरियाणा)
बाढ़ से बचाव की तैयारियों की जानकारी को लेकर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन के जिला कार्यालय की ओर से तैयार किया गया वार्षिक फ्लड कंट्रोल ऑर्डर।
बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पूर्ण रूप से मुस्तैद : उपायुक्त अनीश यादव।
करनाल 29 जुलाई, जिला प्रशासन ने बाढ़ से बचाव की सभी तैयारियां मुकम्मल कर ली हैं। क्या-क्या उपाय किए गए हैं। इनका विवरण राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के जिला कार्यालय की ओर से तैयार किए गए 140 पृष्ठों के वार्षिक फ्लड कंट्रोल ऑर्डर में दिया है। उपायुक्त अनीश यादव इसके जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि जब ताजेवाला हैड से 2.50 लाख क्यूसिक से ज्यादा पानी यमुना नदी में आ जाए, तो जिला स्तर के कंट्रोल रूम में बाढ़ की चेतावनी आ जाती है। यदि इस मात्रा में ओर अधिक इजाफा हो जाता है, तो उससे निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। शुक्रवार को उपायुक्त ने तैयारियों की जानकारी दी।
27 करोड़ 56 लाख 42 हजार रुपये की राशि, बाढ़ बचाव के शॉर्ट, मीडियम व लाँग टर्म के कार्यों पर की खर्च – उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से जिला में बाढ़ से बचाव के लिए 27 करोड़ 56 लाख 42 हजार रुपये की राशि भिन्न-भिन्न कार्यों पर खर्च की गई है, जिसमें 2 शॉर्ट टर्म के, 2 लाँग टर्म और 11 कार्य मीडियम टर्म के शामिल हैं। शॉर्ट टर्म के 2 कार्यों में कुण्डा कला कॉम्पलैक्स पर 8 पुराने स्टोन स्टडों की मरम्मत तथा लालुपुरा कॉम्पलैक्स पर 8 नए स्टोन स्टड बनाए गए हैं। इन पर 3 करोड़ 96 लाख 6 हजार रुपये की राशि खर्च हुई है। इन उपायों से यमुना के साथ लगती कृषि भूमि को बचाया जा सकेगा। इसी प्रकार कैरवाली से मुंडोगढ़ी ड्रेन के आरडी 0 से 42500 तक सफाई, गहराई व मजूबती की गई है और इंद्री एस्केप डे्रन की बुर्जी नम्बर 145000 से 159000 तक की भी सफाई की गई है। इन पर 17 करोड़ 44 लाख 32 हजार रुपये की राशि खर्च हुई है।
उपायुक्त ने आगे बताया कि मध्यावधि यानि मीडियम टर्म के 11 कार्य किए गए हैं, इनमें स्योड़ी माईनर पर ड्रेनज साइफन बनाया गया है। वर्षा के पानी को रिचार्ज करने के लिए 107 बोरवैल बनाए गए हैं। बजीदा ड्रेन की एक नम्बर कन्वर्ट की रिमॉडलिंग की गई, डे्रन नम्बर 1 सुदृढ़ीकरण तथा इंद्री ड्रेन के किनारों का भी सुदृढ़ीकरण किया गया है। मीडियम टर्म के इन कार्यों में धनौरा क्रीक पर कुंजपुरा तटबंध के अपोजिट एक कोज-वे (पुलिया) बनाई गई है। इन कार्यों पर 6 करोड़ 16 लाख 4 हजार रुपये की राशि खर्च की गई है।
मोबाइल वायरलेस स्टेशनों की स्थापना- उपायुक्त ने बताया कि इन्द्री उपमण्डल में गढ़पुर टापू कॉम्पलैक्स, कुंजपुरा में जम्मूखालां कॉम्पलैक्स तथा घरौंडा के मुंडोगढ़ी कॉम्पलैक्स में मोबाइल बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इन्द्री फ्लड कंट्रोल रूम में सम्पर्क नम्बर 94163-22058 तथा 94165-67853 हैं। करनाल के कंट्रोल रूम में 98964-53960 तथा 94662-69551 सम्पर्क नम्बर है, जबकि घरौंडा के फ्लड कंट्रोल रूम के लिए 94165-66321 तथा 97293-20836 नम्बर दिए गए हैं। जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष सैक्टर-12 के जिला सचिवालय में प्रथम तल पर स्थित डीआरओ ऑफिस के कमरा नम्बर 10 में बनाया गया है, जिसका सम्पर्क नम्बर 0184-2267271 है। जिला मुख्यालय पर पुलिस कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जिसका सम्पर्क नम्बर 0184- 2267700 है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त जिला के राहड़ा, बंदराला, बाहरी, अरड़ाना, गंगाटेहड़ी तथा कमालपुरा गड़रियां में रिंग बांधों की मरम्मत करवाई गई है।
निम्र जगहों पर स्थापित किए जा सकते हैं इवेक्यूएशन सेंटर- उपायुक्त ने बताया कि बाढ़ की स्थिति में करनाल के जड़ौली, मोहीदीनपुर व नलवीखुर्द, इन्द्री के गढ़ीबीरबल व बयाना तथा घरौंडा के मुंडोगढ़ी, सदरपुर व गढ़ीभरल में इवेक्यूएशन सेंटर स्थापित किए जा सकते हैं।
विलेज डिजास्टर कमेटी का गठन- उन्होंने बताया कि गांवो में विलेज डिस्जास्टर कमेटी बनाई गई हैं। निवर्तमान सरपंच कमेटी के चेयरमैन हैं और ग्राम सचिव को कमेटी का नोडल अफसर बनाया गया है। पटवारी, नबंरदार, एससी पंच, बीसी पंच, महिला पंच, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह की हैड, स्कूल प्रतिनिधि तथा भूतपूर्व सैनिक को कमेटी में बतौर मैम्बर शामिल किया गया है।
बाढ़ बचाव उपकरणों की उपलब्धता- उन्होंने बताया कि जिला में पर्याप्त मात्रा में किश्तियां, ओबीएम, चप्पू, कुंडे, लाईफ जैकेट, ट्रेलर, टूलकिट, आयल टैंकर, टयूब, अस्का लाईट, सर्च लाईट और रस्सियां उपलब्ध हैं। इसी प्रकार जेटिंग मशीन, सुपर सकर मशीन तथा 34 सरकारी व गैर-सरकारी जेसीबी हैं। पांच सीवर क्लीनिंग मशीन भी उपलब्ध हैं। पानी निकासी के लिए 48 डीजल तथा 47 विद्युत चालित पम्प सही हालत में उपलब्ध हैं। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से घरौंडा व तरावड़ी में 2-2 तथा निसिंग में 1-1 पानी निकासी के पम्प स्थापित किए गए हैं। जिला में 5 गोताखोर भी हैं। करीब 10 कर्मचारियों को बाढ़ से बचाव का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
बीते वर्षों में यह रही जिला में बाढ़ की स्थिति- फ्लड कंट्रोल ऑर्डर के चैप्टर 3 में जिला में बीते वर्षों में बाढ़ का संक्षिप्त इतिहास दिया गया है। इसमें बताया गया है कि वर्ष 1978 में यमुना में 7.14 लाख क्यूसिक रिकॉर्ड पानी से बाढ़ आई थी और इससे भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद वर्ष 2010 में 7.45 लाख क्यूसिक पानी यमुना में आया, जिसने 38 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। वर्ष 2013 में भी रिकॉर्ड 8 लाख 6 हजार 464 क्यूसिक पानी यमुना में आया, इससे कईं बंध टूट गए और करनाल जिला के विभिन्न जगहों पर बाढ़ से भारी नुकसान हुआ। इसके पश्चात वर्ष 2014 में अधिकतम 1 लाख 28 हजार 339 क्यूसिक, 2015 में 1 लाख 1 हजार 360 क्यूसिक, 2016 में 4983.80 क्यूसिक, 2017 में 1 लाख 47 हजार क्यूसिक, 2018 में 6 लाख 5 हजार क्यूसिक पानी आया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में 8 लाख 28 हजार क्यूसिक पानी यमुना में रिकॉर्ड किया गया। इसका कारण पहाड़ों पर भारी बारिश का होना था। लेकिन खास बात यह है कि प्रशासन की मुस्तैदी और किए गए ठोस प्रबंधों के चलते बाढ़ से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके लिए हरियाणा सरकार की ओर से सिंचाई विभाग करनाल के कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता को प्रशंसा पत्र दिए गए।
फोटो कैप्शन :
1 सिंचाई विभाग द्वारा यमुना किनारे लगाए गए नए स्टोन स्टड।
2 सिंचाई विभाग द्वारा डे्रन नम्बर 1 की उचित तरीके से करवाई गई सफाई, गहराई और सुदृढ़ीकरण।


















