AIRA NEWS NETWORK – 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन के वीरांगना कनकलता बरुआ और मुकुंद काकती साथ गोहपुर के 26 सेनानियों के नाम को जोड़ कर गोहपुर के स्थानीय संवाददाता रमेन बोरा ने एक देश प्रेम मूलक गीत की रचना किया था। इस गीत को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने अपने रिकॉर्ड में स्थान दिया है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में 20 सितंबर को ब्रिटिश पुलिस हाथो शाहिद हुए कनकलता बरुआ और मुकुंद काकती के साथ अन्य जो पुरुष सेनानी थे उनमें सबसे पहला नाम आता है रामपति राजखोवा का जिन्होंने गोलीकांड के बीच ही गोहपुर थाना पर तिरंगा लहरा दिया था।
अन्य ठुलेस्वर राजखोवा, खरगेश्वर बरुआ, जितेंद्र कुमार बरुआ, अर्जुन राजखोवा, लखी बरा, हेम बरुआ, मीनाराम बरुआ, थानेश्वर बरुआ, भोलाराम बरदलै, जुनाराम भुइयां, कर्णेश्वर हजारिका, पद्मनाथ गोस्वामी, पुतुल सिंह, चंद्रकांत बरदलै, थानेस्वर बरुआ, मोहन महंत, बेनुधार दत्त, मनोरम बोरा, तुषण चंद्र महंत, तिलेश्वर बरुआ, मघीराम बोरा, गजेंद्र नाथ गोस्वामी, हेम कांत बरुआ, हरेंद्र नाथ सैकिया,दंडेश्वर गोगोई और महिम चंद्र सिंह के नमो को जोड़ कर रमेन बोरा ने इस गीत की रचना “मई कनकलता मुकुंदरे गोहपुरर डेका” नामक शीर्षक के नाम से की है।
गोहपुर के एक अन्यतम शिक्षाविद और संगीत प्रेमी यादव चलिए ने इस गीत को कंठ दिया है, वरिष्ठ संगीतकार विजय बोरा ने अपने शुरों से सजाया है और मानस प्रतिम बोरा के धुन से सुसज्जित इस गीत को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने स्वीकृति प्रदान की है जिससे रचनाकार रमेन बोरा उत्साहित है। मालूम हो कि इस संगीत के रचनाकार रमेन बोरा गोहपुर के कोकिला चरियाली निवासी दंबरू बोरा के पुत्र है। डंबरू बोरा भारतीय नई सेना के रिटायर और स्थानीय विद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक है।
रमेन बोरा के लिखे पांच देश प्रेम मूलक गीत सहित कुल 21 गीत प्रकाशित हो चुके है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के प्रबंधन ने बोरा को उनके इस रचना के लिए एक प्रमाण पत्र, एक सुनहरा प्रतीक, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के एक पुस्तक, एक बेज, एक पहचान पत्र के साथ एक कलम से नवाजा हैं।
सुमरिन योगी की रिपोर्ट


















