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मुजफ्फरनगर में बड़ा राजनीतिक संदेश:आसपा के मंच पर शाहनवाज़ राणा,गाज़ी और नवाज़िश-पश्चिम यूपी में तूफ़ान से पहले की आहट

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मुजफ्फरनगर में बड़ा राजनीतिक संदेश: असपा के मंच पर शाहनवाज़ राणा, गाज़ी और नवाज़िश-पश्चिम यूपी में तूफ़ान से पहले की आहट

पश्चिम यूपी में नए ‘पावर ब्लॉक’ की आहट

मुजफ्फरनगर।
पश्चिम यूपी की राजनीति रविवार को उस वक़्त गर्म हो गई, जब आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मंच पर तीन बड़े मुस्लिम चेहरे—
बिजनौर के पूर्व विधायक शाहनवाज़ राणा,
बढ़ापुर के पूर्व विधायक गाज़ी,
और पूर्व मंत्री नवाज़िश आलम
एक साथ दिखाई दिए।

यह सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं था—यह एक राजनीतिक संकेत, एक शक्ति प्रदर्शन, और मौजूदा समीकरणों के लिए चुनौती का ऐलान था।

यह संयोग नहीं—संदेश था

राजनीतिक गलियारों में इसे साधारण उपस्थिति नहीं, बल्कि एक सोच-समझ कर किया गया पावर शो माना जा रहा है।
पश्चिम यूपी में वर्षों से बिखरे मुस्लिम नेतृत्व का यह मंचन—
असपा की रणनीति को साफ़ करता है:
“दलित–मुस्लिम–OBC गठजोड़ को नए सिरे से खड़ा करो और मैदान में उतर जाओ।”

तीन नेताओं के एक मंच पर आने के मायने

शाहनवाज़ राणा का खुला समर्थन—बिजनौर से लेकर राजधानी तक हलचल पैदा करता है।

गाज़ी की मौजूदगी—बढ़ापुर-धामपुर के समीकरण को नई दिशा देती है।

नवाज़िश आलम का साथ—असपा को मुस्लिम समाज के भीतर एक “वेटेज” प्रदान करता है।

तीनों चेहरों का एक साथ खड़ा होना—
“पश्चिम यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का नया ध्रुवीकरण” माना जा रहा है।

राजनीतिक दलों मे क्यों घबराहट..?

यह तस्वीर कई दलों के लिए बेचैनी का कारण बन रही है—
क्योंकि पश्चिम यूपी में चुनावी गणित एक सीट से नहीं,
पूरे क्षेत्र के राजनीतिक संतुलन से तय होता है।

असपा जिस सोशल इंजीनियरिंग पर काम कर रही है, उसमें यह तीनों नेता
एक बड़े वोट-ब्लॉक को सक्रिय कर सकते हैं।

मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर—
इन तीन जिलों में मुस्लिम वोट 30–45% तक है।
ऐसे में इन नेताओं का एकजुट मंच पर आना सिर्फ़ फोटो नहीं—
आगे की बड़ी तैयारी का ट्रेलर है।

निष्कर्ष: पश्चिम यूपी में तूफ़ान से पहले की आहट

इस कार्यक्रम ने यह साफ़ कर दिया है कि असपा अब महज़ “उभरती पार्टी” नहीं,
बल्कि पश्चिम यूपी में विपक्ष के समीकरण बदलने वाली ताक़त बनने की तरफ बढ़ रही है।

और इन तीन नेताओं की साथ मौजूदगी—
आने वाले चुनावों में बड़े उलटफेर की बुनियाद साबित हो सकती है।

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