करनाल-हरियाणा

नगर पालिका सेवाओं की जलवायु स्मार्ट डिलीवरी को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन,

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नगर पालिका सेवाओं की जलवायु स्मार्ट डिलीवरी को लेकर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन,

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के विशेषज्ञों ने ठोस अपशिष्टï प्रबंधन, जल प्रबंधन व चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसे बिन्दूओं पर दी जानकारी।
पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी-धीरज कुमार, अतिरिक्त निगम आयुक्त।
करनाल 26 अक्तूबर, हरियाणा सरकार एवं नगर निगम करनाल के सहयोग से भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के शहरी अध्ययन केन्द्र ने नगर पालिका सेवाओं की जलवायु स्मार्ट डिलीवरी (क्लाईमेट स्मार्ट डिलीवरी ऑफ म्यूनिसिपल सर्विसिस) विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का होटल प्रेम प्लाजा में आयोजन किया गया। कार्यशाला में करनाल कलस्टर की 18 यूएलबी के तकनीकी विशेषज्ञों, अभियांत्रिकी एवं सफाई शाखा से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा नगर पालिका सचिवों ने भाग लिया।
कार्यशाला में शहरी अध्ययन केन्द्र के संयोजक प्रोफेसर के.के. पांडेय तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार सिंह ने जलवायु परिवर्तन पर नगर पालिका सेवाओं की पहचान भूमिका, जलवायु स्मार्ट डिलीवरी के लिए ठोस अपशिष्टï प्रबंधन की जांच, चक्रीय अर्थव्यवस्था के दायरे और प्रथाओं का विश£ेषण, शहरों में जल प्रबंधन और उपयुक्त रणनीतियों का वर्णन तथा सम्बंधित शहर के लिए टेक होम पाँयट तैयार करने जैसे बिन्दूओं की पावर पाँयट प्रैजेन्टेशन के माध्यम से जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि नगर निगम/पालिका सेवाओं की जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से बचाव को लेकर क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं, जैसी भूमिका पर विचार किया गया। नगर पालिका सर्विसिस की अनेक सुधारों पर बात की गई, जो देश के अनेक हिस्सों में और देश से बाहर प्रदूषण व पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य किए गए हैं। इन क्षेत्रों में कूड़ा निष्पादन, सडक़ व फूटपाथों की व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों का सदुपयोग, वाटर बॉडिज का संरक्षण और चक्रीय अर्थव्यवस्था शामिल हैं। इन्ही आधार पर प्रतिभागियों ने टेक होम पाँयट्स को चिन्हित किया, जिन्हें नगर निकाय आसानी से अपना सकते हैं।
उन्होंने बेंगलोर, इंदोर, दिल्ली, भोपाल व पश्चिमी देशों में अपनाई गई केस स्टडिज़ को उल्लेखित किया, जिससे कूड़ा-कर्कट और किचर वेस्ट का विकेन्द्रीयकृत निस्तारण किया जा सके, ताकि डम्पिंग ग्राउण्ड्स में कम से कम मात्रा में कचरा पहुंचे। उन्होंने सूरत के ड्रेनिंग प्लान, पुने के कूड़ा निष्पादन और अहमदाबाद व नागपुर के ट्रीटेड सीवेज वाटर का उद्योगों में उपयोग जैसी बेस्ट प्रैक्टिसिस सांझा की।
इस मौके पर अतिरिक्त निगम आयुक्त धीरज कुमार ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान से आए प्रोफेसर्स तथा यू.एल.बी. से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्वागत किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, ताकि आबो-हवा सुरक्षित रहें और हमारी आने वाली पीढिय़ा सुरक्षित वातावरण में रह सकें। उन्होंने कहा कि शहर के विकास के लिए जो भी परियोजनाएं लाई जाएं, उनमें पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में अवश्य रखें। किसी कार्य को लेकर केन्द्र सरकार, एन.जी.टी. या किसी भी विभाग द्वारा जो नियम बनाए गए हैं, उनकी पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जो भी कार्य करें, उसे बेहतर तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर काम करेंगे, तो वह आसान भी होगा और सम्भव भी। उन्होंने उपस्थित सभी से अपील करते कहा कि वह कार्यशाला से सीख कर जाएं, ताकि वह आने वाले समय में हमारे काम आ सके।

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