मैनपुरी-उत्तरप्रदेश

डॉ भीमराव अंबेडकर की 134वी जयंती मैनपुरी में बड़े धूमधाम से मनाई गई जिलाधिकारी व रामनरेश अग्निहोत्री कलेक्ट्रेट बात विवाद गोष्टी सेमिनार में मौजूद रहे

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डॉ भीमराव अंबेडकर की 134वी जयंती मैनपुरी में बड़े धूमधाम से मनाई गई जिलाधिकारी व रामनरेश अग्निहोत्री कलेक्ट्रेट बात विवाद गोष्टी सेमिनार में मौजूद रहे

आईरा न्यूज़ नेटवर्क स्टेट ब्यूरो सुबोध कुमार मैनपुरी

मैनपुरी भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित वाद-विवाद गोष्ठी, सेमीनार कार्यक्रम के अवसर पर पूर्व मंत्री, विधायक भोगांव रामनरेश अग्निहोत्री, जिलाध्यक्ष ममता राजपूत, जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु, अपर जिलाधिकारी राम जी मिश्र ने बाबा साहेब के चित्र का अनावरण कर माल्यार्पण, पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये पूर्व मंत्री, विधायक भोगांव रामनेश अग्निहोत्री ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर उस काल में पैदा हुये, जिस काल में गरीबी, अशिक्षा, छुआ-छूत, पिछड़ापन चरम पर था, गरीबी से उठकर लंदन, अमेरिका में पढ़ाई कर 04 विषयों में पी.एच.डी. की, भारत रत्न की उपाधि मिली, बाबा साहेब एक नाम नहीं बल्कि विचार है, बाबा साहेब ने गरीबों, पीड़ितों, शोषितों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया, वह केवल दलित समाज के नेता नहीं थे, वह देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए आदर्श थे और आज भी आदर्श हैं, आज जो धारणा देश के अंदर बन रही है कि अमुक नेता हमारे जाति का है, अमुक समाज सुधारक, महापुरुष हमारी जाति का है, उसी जाति के ही लोग उसकी जयंती मनाते हैं, यह महापुरुषों के साथ अन्याय है, बाबा साहेब एक जाति के नेता नहीं बल्कि महान समाज सुधारक थे, महापुरुषों को जातियों में न बांटे यह प्रत्येक भारतवासी के गौरव के प्रतीक है।
विधायक भोगांव ने कहा कि आज भी अगड़ा-पिछड़ा-दलित की सोच देश की विकास की यात्रा में सबसे बड़ी बाधक है, इसे प्रत्येक दशा में समाप्त करना होगा, कोई अगड़ा, कोई पिछड़ा, कोई दलित नहीं सभी भारत मां के सपूत हैं, सबको मिलकर देश को आगे बढ़ाना है, यही विचार पार्टी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव हेगड़ेवाल ने वर्ष 1925 में कहा था कि जब तक देश में छुआ-छूत बनी रहेगी, तब तक यह देश महान नहीं बन सकता। उन्होने कहा कि भगवान ने जातियां नहीं बनायीं केवल मनुष्य बनाये, जाति विभाजन करने का कार्य देश में आक्रांताओं ने किया, डिवाइड एंड रूल की नीति पर अपना शासन चलाया, बाबा साहेब के बने हुए लोकतंत्र से ही देश आगे बढ़ा है और इसी संविधान के रास्ते पर चलकर हमारा देश विश्व के नंबर एक पर पहुंचेगा, देश के प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विश्व गुरु, पूर्ण विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है, और इस संकल्प को हम सबको मिलकर पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सब सौभाग्यशाली है कि हम भारत के स्वर्णिमकाल में जी रहे हैं, आज जहां तमाम देशों में अराजकता का माहौल है, लोकतंत्र की हत्या हो रही है, भ्रष्टाचार चरम पर है लेकिन हमारा देश शांति के साथ विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें सबसे बड़ा योगदान संविधान निर्माता बाबा साहेब का है, उन्ही के बताए हुए रास्ते पर देश आगे बढ़ रहा है।
जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर जी का आज की परिस्थितियों में कितना सम्मान है, आज पूरे देश में संविधान निर्माता का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है, आज महान विभूति के जन्म दिवस के अवसर पर ही इस गोष्ठी का आयोजन हो रहा है। उन्होने कहा कि हम किसी भी व्यक्ति के बारे मे धारणा, राय तत्काल बना लेते हैं, जानकारी हो न हो लेकिन तत्काल निर्णय सुना देते हैं, जबकि डा. भीमराव अम्बेडकर जी के जीवन से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि जहां तक हो सके ज्ञानार्जन करें, आज परिस्थितियां बदली हैं, आज ज्ञान के रास्ते सभी के लिए खुले हैं, आज सामाजिक, आर्थिक, न्याय के लिए स्वतंत्रता है और सबसे अधिक महत्वूपर्ण विवेक की स्वतंत्रता है, विवेक की कसौटी पर परखने, जानकारी करने के उपरांत ही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें। उन्होने कहा कि डॉ. अंबेडकर जी के तत्कालीन परिस्थितियों की कल्पना मात्र कर सकते हैं और वह कल्पना यथार्त के निकट तब होगी जब हम अधिक से अधिक उनके बारे में अध्ययन करेंगे, उस समय कितनी सामाजिक असमानताएं व्याप्त थीं, उस माहौल में शिक्षा प्राप्त करना बेहद कठिन था, बाबा साहेब की राह आसान नहीं थी, उनकी महानता इसी बात में हैं कि अत्यतं गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद, सामाजिक असमानता भरे समाज के बाद भी इतना ज्ञान अर्जित किया। उन्होने कहा कि आज हम अपनी पढ़ाई, ज्ञान का उपयोग सबसे पहले स्वयं, परिवार के लिए करते हैं लेकिन बाबा साहेब ने अपने ज्ञान का उपयोग समाज सुधार में किया, उनके जीवन मंे आने वाली कठिनाईयां किसी के जीवन में न आयें इस दिशा में कार्य किया।
श्री सिंह ने कहा कि आज हम जिस संविधान की बात करते हैं, उस संविधान में उनका योगदान कितना जबरदस्त था, प्रारूप समिति के अध्यक्ष डा. अंबेडकर बाबा साहेब को इसलिए बनाया गया कि उनसे ज्यादा ज्ञान, शिक्षा, डिग्री वाला व्यक्ति नहीं था, इस देश को संविधान देने के बाद वह स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बने। उन्होने उपस्थित लोगों का आव्हान करते हुये कहा कि बाबा साहेब को सच्ची श्रृद्धाजंलि उनके बारे में अधिक से अधिक पढ़ा जाये, युवा न सिर्फ संविधान निर्माता के बारे में पढ़ें बल्कि देश के प्रत्येक महापुरूष, स्वतंत्रता सैनानियाे के बारे में पढ़ जानकारी करें। उन्होने कहा कि भारत का संविधान हर घर में हो, शिक्षा में भारत का संविधान समावेश है लेकिन प्रत्येक अभिभावक का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को भारत का संविधान अत्यन्त सरल शब्दों में बताएं, संविधान के बारे में बताने से बच्चों में शुरू से ही स्वतंत्र समझ पैदा होगी, दूसरे हमारे देश को स्वतंत्रता किस परिस्थितियों, कितने संघर्षोंं, बलिदानों के बाद मिली, की जानकारी बच्चों को होगी। उन्होने कहा कि समाज में जो थोड़ी बहुत विषमता मौजूद है, उन विषमताओं को दूर करने के लिए सभी को सम्मलित प्रयास करने होंगे, वास्तव में महापुरूष जिन्होने जाति व्यवस्था, सामाजिक विषमता, समाज मंे कमियों को दूर करने के लिए जीवन में भर संघर्ष किया, ऐसे महापुरूषों को जाति के बंधनों में न बांधा जाये, यह हम सबके लिए महापुरूष है, इन बातों पर भी विचार करना होगा।
जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 134वीं जयंती पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज जो देश में व्यवस्था है, वह बाबा साहेब की ही देन है, उनके द्वारा बनाए गए संविधान में सभी को बराबर का हक दिया, शिक्षित बनो, संगठित रहो, यह बाबा साहेब का नारा था, संविधान में प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार प्रदत्त किये, पिछड़े समाज के लोगों को कुएं से पानी भरने का अधिकार नहीं था, मताधिकार करने का भी अधिकार नहीं था, लेकिन उन्होंने प्रत्येक वर्ग के लोगों को मताधिकार के साथ-साथ महिलाओं को भी समान अधिकार देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के सामने संकट होता है और उसे जीवन बचाने के लिए रक्त की आवश्यकता होती है, तो वह ब्लड बैंक से बिना किसी जानकारी के ब्लड लाकर मरीज को लगाता है, उस समय कोई यह नहीं देखता कि यह ब्लड किस जाति के व्यक्ति का है, हमें मिलकर अपने बीच फैली कुरीतियों को दूर करना होगा, अपने महापुरुषों को सम्मान देकर उनके दिखाए हुए रास्ते पर चलकर देश के विकास में अपना योगदान देना होगा।
मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने कहा कि आजादी से पूर्व हम 02 प्रकार की गुलामी से लड़ रहे थे, एक ओर अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिए लड़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के विरुद्ध जंग चल रही थी और समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में बाबा साहेब ने अपने तर्क, ज्ञान का समावेश कर समाज से छुआ-छूत दूर करने का कार्य किया। उन्होंने समाज के हर वर्ग के लिए कार्य किया, अपनी बुद्धि का प्रयोग देश के सिस्टम को चेंज करने में किया, अपने ज्ञान से ऐसा संविधान दिया जिस पर चलकर आज हमारा देश एकता, अखंडता के रास्ते पर चल नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होने कहा कि आज परिवेश बदल रहा है, आज युवा पीड़ी को न तो किताब पढ़ने में रुचि है और नाहीं किसी की बात सुनने में और नाही ज्ञान अर्जित करने में, हमें इस ओर सोचना होगा, प्रत्येक व्यक्ति की बात सुनने की आदत डालनी होगी, किताबों को मित्र बनाना होगा, ज्ञान अर्जित कर अपने और अपने समाज का मार्ग प्रशस्त करना होगा यही भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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