छह वर्षीय बालिका की आवारा कुत्तों के हमले से हुई मौत की मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज मुआवजे की माँग
छह वर्षीय बालिका की आवारा कुत्तों के हमले से हुई मौत की मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर मुआवजे की माँग
बिजनौर/लखनऊ, 07 जून 2025
जनपद बिजनौर के तहसील अफजलगढ़ स्थित फैज़ी कॉलोनी में शुक्रवार प्रातः एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसमें आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा किए गए हमले में एक छह वर्षीय बालिका यासमीन की क्रूरतापूर्वक मौत हो गई। यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि नागरिकों के जीवन एवं सुरक्षा के मूलभूत अधिकारों पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्ची अपनी माँ के साथ दूध लेने निकली थी, तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल यासमीन को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिसकी शिकायतें बार-बार नगर पालिका व प्रशासन से की गईं, किन्तु कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

इस गंभीर प्रकरण पर वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (WAOHR) संस्था के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. तारिक़ ज़की ने टाइम ऑफ जनसत्ता मे प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग को एक शिकायत पत्र भेजते हुए मांग की है कि:

- पीड़ित परिवार को ₹5 लाख की आर्थिक क्षतिपूर्ति तत्काल प्रदान की जाए।
- संबंधित नगर निकाय, पशुपालन विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- क्षेत्र में आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान हेतु पारदर्शी व प्रभावी कार्ययोजना लागू की जाए।
- आयोग उक्त घटना को मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में लेते हुए दोषी संस्थाओं से प्राथमिक रिपोर्ट तलब करे।
डॉ. ज़की ने आरोप लगाया कि यह घटना “जीवन के अधिकार” (Right to Life) का घोर उल्लंघन है तथा यदि राज्य सरकार और प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया तो उनकी संस्था वृहद जनजागरण एवं विधिक कार्रवाई आरंभ करेगी।
गौरतलब है कि पिछले चार महीनों में जनपद में यह दूसरी घटना है जिसमें आवारा कुत्तों द्वारा एक मासूम की जान ली गई है।
इस त्रासदी ने एक बार फिर नगर निकायों की जवाबदेही, शहरी प्रबंधन की विफलता एवं नागरिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब देखना यह है कि आयोग एवं शासन-प्रशासन इस दिशा में कितना संवेदनशील और प्रभावी रुख अपनाते हैं।


















