वाराणसी/उत्तरप्रदेश

कोस्तुभ जयंती समारोह के अंतर्गत उपशास्त्रीय गायन कार्यशाला का द्वितीय दिवस संपन्न

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वाराणसी, 12 फरवरी 2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय द्वारा कोस्तुभ जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय उपशास्त्रीय गायन कार्यशाला का द्वितीय दिवस पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ। कार्यशाला की आमंत्रित विशेषज्ञ बनारस घराने की प्रतिष्ठित विदुषी मीना मिश्रा रहीं।
द्वितीय दिवस के सत्र में विदुषी मीना मिश्रा ने उपशास्त्रीय संगीत की विविध लोक-आधारित शैलियों का क्रमबद्ध अभ्यास कराया। उन्होंने होली में गाया जाने वाला दादरा “मोपे डारो न रंग गिरधारी रे”, पारंपरिक होली “तुम राधे बनो श्याम हम नंदलाला”, चैती “चैत मास सैंयां नहीं अइले हो रामा जिया घबराईहैं”, कजरी “जमुना किनारे पड़ा हिंडोल, कहे को मेरो पालना” तथा एक अन्य कजरी “अरे राम बरखा की आई बहार” सिखाई। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने प्रत्येक विधा की लय, भाव, उच्चारण, बनारसी अंग तथा प्रस्तुति शैली की सूक्ष्म बारीकियों पर विशेष प्रकाश डाला। सत्र के अंत में विद्यार्थियों ने सीखी गई रचनाओं की प्रस्तुति दी, जिसकी विशेषज्ञ द्वारा सराहना की गई।
कार्यक्रम की संयोजक प्रो. संगीता पंडित, संकाय प्रमुख एवं विभागाध्यक्षा, गायन एवं संगीतशास्त्र विभाग, संगीत एवं मंच कला संकाय रहीं। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य एवं डॉ. श्यामा कुमारी, गायन विभाग, ने कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय किया।
प्रस्तुति में हारमोनियम पर डॉ. इंद्रदेव चौधरी जी ने सधी हुई एवं भावानुकूल संगत प्रदान की तथा तबले पर पंकज राय ने उत्कृष्ट ताल-संयोजन के साथ कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। मुख्य कलाकार एवं संगतकारों के मध्य सुमधुर तालमेल ने प्रस्तुति को विशेष ऊँचाई प्रदान की। इस अवसर पर डॉ. राम शंकर, डॉ. ज्ञानेश चंद्र पाण्डेय, प्रो. रेवती सकलकर, डॉ. कुमार अंबरीश चंचल, प्रो. संगीता सिंह, प्रो. प्रेम किशोर मिश्र तथा पंडित कुबेरनाथ मिश्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संकाय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को उपशास्त्रीय गायन की विविध शैलियों की व्यावहारिक समझ प्रदान करना तथा बनारस घराने की समृद्ध सांगीतिक परंपरा को सुदृढ़ करना है।

Sallauddin Ali

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