विकास नगर पावर हाउस में बवाल: SSO और संविदा कर्मियों से मारपीट, विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

लखनऊ। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (मध्यांचल डिस्कॉम) के अंतर्गत जानकीपुरम जोन के विकास नगर पावर हाउस में हुई एक दुखद और चिंताजनक घटना ने पूरे विभाग को झकझोर दिया है। सूत्रों के अनुसार, स्वयं को एडवोकेट बताने वाले एक व्यक्ति द्वारा पावर हाउस में तैनात SSO सहित अन्य संविदा कर्मियों के साथ कथित रूप से मारपीट की गई।
बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद एक महिला द्वारा भी जमकर उपद्रव किया गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कर्मचारी आत्मरक्षा में मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे। वीडियो बनाना क्या अब अपराध है? या यह अपने बचाव का एकमात्र तरीका बनता जा रहा है?
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
क्या पावर हाउस अब खुला अखाड़ा बन चुका है?
संविदा कर्मी, जिनके पास न सुरक्षा गार्ड न विधिक संरक्षण—क्या वे अब मार खाने के लिए तैनात हैं?
यदि कोई स्वयं को “एडवोकेट” बताकर दबाव बनाए, तो क्या विभागीय कर्मचारी कानून के भय से चुप रहें?
सूत्र बताते हैं कि SSO व अन्य कर्मचारी ड्यूटी पर थे और महिला के आक्रामक व्यवहार को देखते हुए वीडियो बना रहे थे, ताकि भविष्य में तथ्यों को सुरक्षित रखा जा सके। इसी दौरान विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
विधिक पहलू भी गंभीर
यदि वास्तव में किसी सरकारी कर्मचारी के साथ ड्यूटी के दौरान मारपीट हुई है, तो यह केवल विभागीय मामला नहीं बल्कि दंडनीय अपराध है। सरकारी कार्य में बाधा, धमकी और मारपीट—इन सभी धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है।
प्रश्न यह भी है कि क्या इस घटना के बाद FIR दर्ज हुई? क्या संबंधित अधिकारियों ने संज्ञान लिया? )क्या संविदा कर्मियों को विभागीय सुरक्षा व विधिक सहायता मिलेगी?
विभाग के लिए अग्निपरीक्षा
जानकीपुरम जोन में यह घटना केवल एक झड़प नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है जहां फील्ड स्तर के कर्मचारी बिना सुरक्षा कवच के कार्य कर रहे हैं।
यदि आज SSO पिटेगा, कल JE या AE भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
क्या विभाग अपने कर्मियों के साथ खड़ा होगा, या फिर “समझौता” ही एकमात्र स)माधान बताया जाएगा?
UPPCL MEDIA का सीधा सवाल
क्या पावर हाउस परिसर में CCTV फुटेज सुरक्षित है?
क्या संबंधित तथाकथित एडवोकेट की बार काउंसिल पहचान की जांच होगी?
क्या महिला उपद्रव के मामले में विधिक कार्रवाई होगी?
Nविभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि इस प्रकरण को उदाहरण बनाते हुए सख्त कार्रवाई करें, अन्यथा कर्मचारियों का मनोबल गिरना तय है।
UPPCL MEDIA का अहम सवाल—
“जो ड्यूटी पर है, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?”
























