युद्ध और तेज़ होने वाला है. ईरान ने सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और ग़ोलामरेज़ा सुलेमानी की हत्या की बात क़बूल

युद्ध और तेज़ होने वाला है. ईरान ने सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और ग़ोलामरेज़ा सुलेमानी की हत्या की बात क़बूल ली है और कहा है कि इसका बदला लिया जाएगा. ईरान के सैन्य ऑपरेशन पर इन हत्याओं का बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका-इज़रायल की तरह वहां अब कोई भी पॉलिसी डिसिज़न किसी व्यक्ति या नेता के ऊपर नहीं टिका है.
पूरी व्यवस्था सेट है कि किसके बाद कौन व्यक्ति कौन-सा पद संभालेगा. हां, जिस तरह के बयान आ रहे हैं उससे साफ़ लग रहा है कि हमले की तीव्रता और बढ़ने वाली है. पिछले कुछ दिनों से ईरान रोज़ाना औसतन 63 ड्रोन और 30 मिसाइलें दाग़ रहा है, अब यह संख्या और बढ़ सकती है.
इज़रायल-अमेरिका जिस तरह ईरान की टॉप लीडरशिप को टारगेट किए हुए है, ईरान भी अब अमेरिका नहीं, तो कम से कम इज़रायल के कुछ टॉप लीडर को मारकर दम लेगा. अब तक के हमलों में इज़रायल में क्या हुआ है, कोई नहीं जानता, क्योंकि ईरान की तरह इज़रायल किसी नेता की हत्या की बात युद्ध के बीचोबीच कबूलेगा नहीं.
वहां नेता की मौत का संदेश बाहर आते ही अफ़रा-तफ़री मच जाएगी. वहां से सिर्फ़ आसमान में पहुंची मिसाइलों के विज़ुअल आ रहे हैं, इंपैक्ट के विज़ुअल मीडिया तब शूट कर पा रहा है जब वहां की सेना सबकुछ देखकर इज़ाज़त दे दे.
उम्मीद के उलट, अमेरिका भी अब कुछ हफ़्ते और लड़ने को तैयार दिख रहा है. कल ट्रंप के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी कुश देसाई ने अल-जज़ीरा से कहा कि जंग 4-6 हफ़्ते चल सकती है. इसका मतलब है कि अमेरिका इस टाइमलाइन के लिए तैयार है.
ईरान ने पिछले 3-4 दिनों से अमेरिका के रिफ़्यूलिंग टैंकर, हैंगर, बची-खुची ऐसी जगहों जहां से अमेरिकी विमान ऑपरेट कर रहे हैं, बड़ी कंपनियों के दफ़्तर, और इज़रायल में तेल अवीव के अलावा लेबनान के सीमावर्ती इलाक़ों को टारगेट किया है. इन सब जगहों की अलग-अलग अहमियत हैं.
बहरीन, क़तर, और कुवैत में ईरान ने हालत ऐसी कर दी है जहां से अमेरिकी विमान, मिसाइलें, या सैन्य गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी है, लेकिन UAE और सऊदी के कुछ इलाक़ों सा इस्तेमाल अमेरिका अब भी गुपचुप हमलों के लिए कर रहा है. ख़ास तौर पर अबूधाबी से.
इन इलाक़ों पर हमले तेज़ होंगे. साथ ही, हिज़बुल्लाह के ख़िलाफ़ इज़रायल ने पैदल सेना की टुकड़ियां उतार दी है और वह लेबनान के अंदर घुस चुकी है. ईरान अब इज़रायल के कम्यूनिकेशन नेटवर्क को तोड़ने में जुटा है, ताकि लेबनानी इलाक़े और तेल अवीव के बीच ताल-मेल टूट जाए.
अली लारिजानी की हत्या के बाद तेल अवीव और हाइफ़ा में वह हमलों की तीव्रता और बढ़ाएगा. ईरान में टॉप लीडरशिप की जितनी ज़्यादा हत्याएं होंगी, उतने ज़्यादा हार्ड-लाइनर लीडरशिप में आते जाएंगे. उतनी ज़्यादा बदले की कार्रवाई वह करेगा.


















