धामपुर के मैक्स हॉस्पिटल में कथित महिला डॉक्टर द्वारा डिलीवरी-महिला की हालत गंभीर होने के मामले पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान-मामला दर्ज
धामपुर के मैक्स हॉस्पिटल में कथित महिला डॉक्टर द्वारा डिलीवरी,द्वारा महिला की हालत गंभीर होने के मामले पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, मामला दर्ज
धामपुर (बिजनौर)।
जनपद बिजनौर के धामपुर क्षेत्र स्थित मैक्स हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि अस्पताल में बिना वैध विशेषज्ञ चिकित्सा योग्यता के एक महिला डॉक्टर द्वारा गर्भवती महिला की डिलीवरी/ऑपरेशन कराया गया, जिससे पीड़िता की हालत अत्यंत गंभीर हो गई। मामला अब उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में आ चुका है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता दीपा रानी, निवासी ग्राम नसीरपुर बनवारी (थाना धामपुर) को 15 जनवरी 2026 को मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि जिस महिला डॉक्टर ने डिलीवरी कराई, उसके पास MBBS/MD (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) जैसी अनिवार्य चिकित्सा योग्यता नहीं थी। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके पश्चात अस्पताल प्रबंधन ने उसे अन्यत्र रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
इस पूरे प्रकरण को चिकित्सा लापरवाही, अवैध चिकित्सा अभ्यास और मानव जीवन से खिलवाड़ बताया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स से जुड़े डॉ. तारिक ज़की द्वारा इस मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग, लखनऊ में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसे आयोग ने स्वीकार करते हुए डायरी संख्या 361/IN/2026 आवंटित की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि न केवल निजी अस्पताल बल्कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस तरह के अवैध अस्पतालों और फर्जी डॉक्टरों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। यह सीधा-सीधा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन एवं स्वास्थ्य का अधिकार) का गंभीर उल्लंघन है।
मानवाधिकार आयोग से मांग की गई है कि पीड़ित महिला/परिवार को ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) का अंतरिम मुआवज़ा दिलाया जाए, संबंधित अस्पताल प्रबंधन एवं डॉक्टरों के विरुद्ध FIR दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई कराई जाए तथा जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) व अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि धामपुर क्षेत्र में पहले भी संदिग्ध अस्पतालों और अपात्र डॉक्टरों के कारण गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई के चलते ऐसे मामले दोहराए जा रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि मानवाधिकार आयोग इस गंभीर प्रकरण में क्या ठोस कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है।






