गृहयुद्ध में झुलसता म्यांमार और उससे उपजा मानवीय संकट

नई दिल्ली(@RajMuqeet79) म्यांमार में मानवीय संकट गहराता जा रहा है, संघर्ष की जड़ें गहरी होती जा रही हैं, जिससे नागरिक गंभीर खतरे में हैं। लड़ाई के कारण रिकॉर्ड स्तर पर विस्थापन हो रहा है और अंतर-सामुदायिक तनाव फिर से बढ़ रहा है।
राखीन में मानवीय स्थिति बहुत ही बदतर और चिंताजनक है। मानवीय ज़रूरतों के बावजूद, वहा किसी भी तरह की राहत सामग्री ना पहुंचने से स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है।
गर्मी के मौसम, पानी की कमी से समस्या और भी दयनीय हो गई है।अनुमान है कि मध्य और उत्तरी राखीन में करीब 16 लाख लोग अस्पताल की देखभाल तक की पहुँच से दूर हैं।जैसे-जैसे मानसून का मौसम नज़दीक आ रहा है, हाल के महीनों में चिन, मैगवे, सागाइंग और उत्तरी शान में कई टाउनशिप में तेज़ हवाएँ और भारी बारिश हो रही है, जिससे नागरिक संपत्ति और उसके जीवन जीने के साधन या तो क्षतिग्रस्त और या तो नष्ट हो गए हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, म्यांमार में मानवीय संवेदना रखने वाले लोग ज़रूरतमंद लोगों को सहायता पहुँचाना जारी रखे हुए हैं, कम धन और बढ़ती मुद्रास्फीति के बावजूद, बहुत से संगठन 2024 की पहली तिमाही के दौरान लगभग 10 लाख लोगों तक सहायता पहुंचाने में कामयाब रहे हैं।
इस वर्ष म्यांमार के लिए मानवीय सहायता की जरूरत का केवल 11 प्रतिशत ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरे संगठन, मानवीय सहायता पहुंचाने में सफल हुए हैं जोकि लगभग जरूरत के हिसाब से ना के बराबर है।




























