उत्तरप्रदेश

“अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर मदरसा अरबिया क़ुरानिया मे प्रदर्शनी का भव्य आयोजन

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इन्तिजार अहमद खान
इटावा। 18, दिसंबर (नि०प्र०) अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान मदरसा अरबिया क़ुरानिया, इटावा में क्राफ्ट, लैंग्वेज एवं विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निधि सिंह ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर मदरसा परिवार के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निधि सिंह ने कहा कि वर्तमान युग विज्ञान, तकनीक और भाषाओं का युग है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे विज्ञान तथा विभिन्न भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर दक्षता हासिल करें। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते हैं, तभी वे अपने अधिकारों को सही अर्थों में प्राप्त कर पाते हैं। इस प्रकार की शैक्षिक प्रदर्शनियाँ छात्रों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और व्यावहारिक सोच विकसित करती हैं।
प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा विज्ञान से जुड़े विभिन्न मॉडल, हस्तकला की आकर्षक कलाकृतियाँ तथा अरबी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी भाषाओं से संबंधित शैक्षिक चार्ट एवं प्रस्तुतियाँ प्रदर्शित की गईं। विद्यार्थियों ने क़ुरान और विज्ञान के आपसी संबंध, पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों और भाषाओं की उपयोगिता को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया, जिसकी उपस्थित जनसमूह ने भूरी-भूरि प्रशंसा की।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य मौलाना एम एम तारिक शम्सी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मदरसा अरबिया क़ुरानिया का उद्देश्य केवल किताबी या पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों का सर्वांगीण विकास और उनके व्यक्तित्व का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि क़ुरान चिंतन, शोध और ज्ञान की शिक्षा देता है और इसी शिक्षण दर्शन के तहत मदरसा आधुनिक विज्ञान और भाषाओं को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बना रहा है।
उप-प्रधानाचार्य सैयद मोहम्मद साद ने कहा कि आज के वैश्विक दौर में भाषाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हो गया है। अरबी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी जैसी भाषाएँ छात्रों के लिए शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक संवाद के नए अवसर खोलती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भाषाई दक्षता को अपनी ताकत बनाएं।
नाजिम-ए-तालीमात डॉक्टर मुफ्ती मेराज अहमद ने कहा कि इस्लामी इतिहास इस बात का सशक्त प्रमाण है कि मुसलमानों ने विज्ञान, चिकित्सा, गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में विश्व को महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि क़ुरान और विज्ञान में कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। ऐसी प्रदर्शनियाँ छात्रों को शोधपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
अध्यापक मौलाना मोहम्मद याह्या कासमी नदवी ने कहा कि क्राफ्ट और प्रायोगिक गतिविधियाँ छात्रों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने का सशक्त माध्यम हैं। जब विद्यार्थी स्वयं मॉडल बनाते हैं और प्रयोग करते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्थायी हो जाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य शिक्षकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक अधिकार दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से छात्रों में अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूकता पैदा होती है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में भी मदरसा इस प्रकार के रचनात्मक, शैक्षिक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की और प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए मदरसा प्रबंधन व शिक्षकों को बधाई दी। आयोजन से पूरे मदरसा परिसर में शैक्षिक उत्साह और सकारात्मक वातावरण देखने को मिला।

Sallauddin Ali

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