करनाल – पंजाबी साहित्य अकादमी के डिप्टी चेयरमैन स. गुरविन्द्र सिंह धमीजा ने कहा है कि पंजाबी भाषा को सरहदों में नहीं बांटा जा सकता। यह पांच नदियों, पांच राज्यों की भाषा न होकर पूरे विश्व में प्यार और सौहार्द बढ़ाने वाली भाषा है। गुरु नानक देव जी ने 130 देशों का भ्रमण कर पंजाबी भाषा को पूरे संसार तक पहुंचाया। यही कारण है कि गुरु ग्रंथ साहिब जी की सरंचना भी पंजाबी लिपि में की गई। उन्होंने कहा कि भाषा की कोई सरहद नहीं होती।
भाषा को किसी बाऊंडरी में नहीं बांधा जा सकता। वह करनाल के पं. चिरंजी लाल शर्मा पी.जी कालेज करनाल में हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी तथा कालेज के पंजाबी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कवि दरबार और संगोष्ठी में बोल रहे थे। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के तौर पर पंजाबी भवन कनाडा के निर्माता सुखी बाठ और गुरु नानक खालसा कालेज के प्राचार्य डा. मेजर सिंह तथा एम.एल.एन कालेज के पूर्व प्राचार्य रमेश शर्मा व पं चिरंजी लाल शर्मा पी.जी कालेज की प्राचार्य राजेश रानी, नगर निगम के ज्वाईंट कमीश्रर गगनदीप भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में कवियों ने अपने काव्य सरंचना प्रस्तुत की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हरियाणा में पंजाबी भाषा का प्रचार करना है।
इस मौके पर पंजाबी भवन कनाडा के निर्माता सुखी बाठ ने कहा कि पंजाबी भवन का उद्देश्य भी विभिन्न संस्थाओं को साथ लेकर पंजाबी भाषा की प्रफुल्लता के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश में हिंदी के बाद पंजाबी को सेकंड लैंग्वेज का दर्जा प्राप्त है। पंडित चिरंजी लाल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में गुरु नानक खालसा कॉलेज के प्राचार्य डा. मेजर सिंह खैरा भी विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शामिल हुए। डा. मेजर सिंह खैरा ने कहा कि आज इस कार्यक्रम में पंजाबी भाषा के प्रचार के लिए कवि दरबार का आयोजन किया जा रहा है।
वहीं पं. चिरंजी लाल शर्मा कालेज की प्राचार्य राजेश रानी ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि रोजगार के लिहाज से भी पंजाबी भाषा का कितना महत्व है। इस अवसर पर दूर दराज से आए कवि दर्शन बुट्टर, रविन्द्र मशहूर, बलजीत सिंह सैनी, रमेश कुमार, कुलवंत सिंह रफीक, हरदित्त हबीब, प्रदूमन भल्ला, गुल्लू अच्छनपूरियां, अमरिन्द्र सोहल, देविन्द्र बीबीपूरियां मौजूद रहे।
सुमरिन योगी की रिपोर्ट


















