बैक-टू-स्कूल’ अभियान और पुनर्निर्माण कार्यों के माध्यम से एनईएआईडी ने पहुंचाई ऊपरी असम में बाढ़ प्रभावित समुदाय को राहत

गुवाहाटी, असम: हाल ही में ऊपरी असम के तीन जिलों में आई बाढ़ के बाद, नॉर्थईस्ट सेंटर फॉर इक्विटी एक्शन ऑन इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट (एनईएआईडी) ने शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव के 48 गांवों में 4,500 से अधिक परिवारों को आपातकालीन राहत सहायता प्रदान की है। संगठन ने अपने ‘बैक-टू-स्कूल अभियान’ के तहत बाढ़ प्रभावित सात स्कूलों को भी सहायता प्रदान की है। एनईएआईडी ने 24 जुलाई 2026 से आपातकालीन राहत कार्य शुरू किए, जिसके तहत 3,570 परिवारों को राशन किट और 4,537 परिवारों को वाश किट वितरित किए गए। इसके अलावा, जरूरतमंद परिवारों को 968 गद्दे तथा 300 सौर लैंप और टॉर्च भी उपलब्ध कराए गए।
एनईएआईडी अपने राहत कार्यों के पहले चरण का समापन 29 अगस्त 2026 को करेगा। इस चरण के तहत शिवसागर और चराइदेव के पाँच गांवों में 820 परिवारों को आवश्यक घरेलू एवं वाश सामग्री वितरित की जाएगी। इसमें गद्दे, पानी के फिल्टर, रसोई के बर्तन और वाश किट शामिल हैं।
शिवसागर के जिला शिक्षा विभाग के साथ साझेदारी में शुरू किए गए अपने “बैक-टू-स्कूल अभियान” के तहत एनईएआईडी ने अब तक 1,330 स्कूल बैग और स्टेशनरी किट वितरित किए हैं। इस अभियान का लक्ष्य 2,000 विद्यार्थियों तक पहुंचना है। बाढ़ के बाद स्कूल लौटने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित परिस्थितियां सुनिश्चित करने में मदद करने के उद्देश्य से स्कूलों को वाश किट भी उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, एनईएआईडी की योजना बाढ़ से क्षतिग्रस्त स्कूलों के छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों में सहायता करने और बच्चों के लिए मनोरंजन एवं खेल सामग्री उपलब्ध कराने की भी है।
आपातकालीन राहत से इतर भी, एनईएआईडी ने संयुक्त क्षेत्रीय आकलन में भी सहयोग किया है और आपदा प्रतिक्रिया के लिए गठित इंटर-एजेंसी ग्रुप (आईएजी) का सदस्य है। जिला बाल संरक्षण इकाई और रेलवे पुलिस के सहयोग से एनईएआईडी उच्च जोखिम वाले तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की संवेदनशीलता की मैपिंग और मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने की योजना बना रहा है।
अपने सालभर चलने वाले “रीबिल्ड” अभियान के तहत अब एनईएआईडी का ध्यान बाढ़ के प्रभाव से प्रभावित परिवारों को उबरने में सहायता करने पर होगा। पुनर्वास चरण में आवश्यक घरेलू सामान उपलब्ध कराने, घरों और स्कूलों की मरम्मत, आजीविका की बहाली, वनीकरण, समुदाय आधारित पर्यावरण पुनर्स्थापना तथा बच्चों और किशोरों को निरंतर मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने जैसे कार्य शामिल होंगे। यह पहल समुदाय आधारित बाल संरक्षण प्रणालियों को मजबूत करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिक सुदृढ़ एवं आपदा-प्रतिरोधी समुदायों के निर्माण की दिशा में भी काम करेगी।






