
वो मूत्र विसर्जन करते हैं… यह पाद पक्षालन करते हैं…!!!!
✍️ अनिल भंडारी
राजनीति जिसके सर चढ़कर बोल जाए यह कह नही सकते… अठे-पट्ठे कब खुद नेता बन जाएं कह नहीं सकते… छोटे से पद में यह शेर जैसी दहाड़े मारते हैं… आम लोगों पर अत्याचार के साथ ही मूत्र विर्सजन कर जाते हैं… खास लोगों के तलवों के साथ पिछवाड़ा भी चाट जाते हैं… नेताजी का सबसे खास होने का दावा वो सोशल मीडिया के माध्यम से कर जाते हैं… उठाई गिरे “प्रवेश” जैसों की भर्ती कर जाते हैं… अपनी गलतियां फिर उनसे पल्ला झाड़ वो सुधार जाते हैं… एक ही मंच साझा करने के बाद भी झूठ बोल जाते हैं… दलितों को अपना होने का मरहम वो लगाते हैं… लेकिन स्वर्णों द्वारा किए गए अत्याचारों को वो कहाँ रोक पाते हैं… साहब… कुर्सी का नशा जब सर चढ़कर बोल जाता है तो कुछ दिखाई व सुनाई कहां दे पाता है… बयानबाजी में तो हर नेता से लेकर आम करता नजर आता है लेकिन क्या…??? उसकी पीड़ा वो समझ पाता है… उसे इंसाफ वो क्या दिला पाता है…??? उसके साथ सरकारी दफ्तरों से लेकर अधिकारियों के चक्कर वो खाता है…??? उसको इंसाफ क्या 1 या 2 दिन में वो दिला पाता है…??? फिर क्यों वो अपनी राय दे जाता है… अपना दिमाग क्यों वो लगा जाता है… चंद घण्टों में भुलाए जाने वाले विचार वो क्यों सोशल मीडिया पर डाल हीरो बनता नजर आता है… पर पीड़ा का ही वो मजाक बनाता नजर आता है… अपनी पीड़ा वो छुपाता है… पद की लालसा में सालो गुलामी कर जाता है… सिलवटें मिटाने जैसी दरी बिछाने में भी वो नहीं शर्माता है… अपनी जमीन वो खुद ही बनाता है… लेकिन जरा भी चूक होंते ही वो उसी नेता के जूते से लात भी खाता है…फिर भी वो नेता के गुण ही गाता है…प्रवेश पाने के लिए ऐसी ही मानसिकता चाहिए….नेताओं को भी तो अत्याचार करने के लिए ऐसे ही प्रवेश अपने साथ चाहिए …!!!✍🏻🙏🏻💐




























