“युवा की मौत पर राज्य मानवाधिकार आयोग सख्त-बिजनौर डीएम को जवाब तलब, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप”
“युवा की मौत पर राज्य मानवाधिकार आयोग सख्त — बिजनौर डीएम को तलब, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप”
सार्वजनिक मार्ग पर जर्जर पेड़ गिरने से हुई मौत के मामले में आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 23 अप्रैल तक जवाब देने के निर्देश
लखनऊ/बिजनौर, 25 फरवरी 2026।
सार्वजनिक मार्ग पर जर्जर एवं खतरनाक पेड़ गिरने से एक युवक की दर्दनाक मृत्यु के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी बिजनौर को नोटिस जारी कर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने इस प्रकरण को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा मामला मानते हुए 23 अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।


शिकायतकर्ता डॉ. मोहम्मद तारिक ज़की, राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी, वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स, द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत (डायरी संख्या 1243/IN/2026) में आरोप लगाया गया है कि 18 फरवरी 2026 को नजीबाबाद-बुंदकी रोड पर स्थित एक अत्यंत जर्जर एवं खतरनाक पेड़ गिरने से ग्राम इस्सेपुर निवासी 28 वर्षीय अनस खान की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
शिकायत में कहा गया है कि संबंधित पेड़ की जर्जर अवस्था के संबंध में पूर्व में भी प्रशासन और वन विभाग को सूचित किया गया था, किंतु किसी प्रकार की रोकथाम या सुरक्षा कार्रवाई नहीं की गई। इसे “Gross Administrative Negligence” एवं “Dereliction of Statutory Duty” बताते हुए मृतक के परिजनों को न्यूनतम 10 लाख रुपये की संवैधानिक क्षतिपूर्ति प्रदान करने की मांग की गई है।
आयोग की ओर से 23 फरवरी 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि जिलाधिकारी, बिजनौर शिकायतकर्ता को सम्मिलित करते हुए आवश्यक जांच कर आयोग के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध की गई है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते सार्वजनिक मार्गों पर खतरनाक पेड़ों का सर्वेक्षण एवं निष्पादन करता, तो एक युवा की जान बचाई जा सकती थी। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट और आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
























