असम/गुवाहाटी

NGT ने असम सरकार के चुनाव ड्यूटी के लिए वन संरक्षण बल तैनाती के आदेश पर लगाई रोक।

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NGT ने असम सरकार के चुनाव ड्यूटी के लिए वन संरक्षण बल तैनाती के आदेश पर लगाई रोक।

पंकज नाथ, असम , 2 अप्रैल :

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने असम सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें वन संरक्षण बल के लगभग 1,600 कर्मियों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात करने का निर्देश दिया गया था। NGT ने इस कदम को ‘कानून के विरुद्ध’ करार देते हुए इसे अवैध ठहराया। असम सरकार के विशेष मुख्य सचिव एम.के यादव ने हाल ही में निर्देश जारी कर असम वन संरक्षण बल (AFPF) के करीब 1,600 कर्मियों को चुनावी कर्तव्यों के लिए तैनात करने का आदेश दिया था। इन कर्मियों को 3 अप्रैल से पहले अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया था। यह निर्णय आगामी लोकसभा या अन्य चुनावों की तैयारी के तहत लिया गया था, लेकिन पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने इसकी कड़ी आलोचना की। NGT ने सुनवाई के दौरान सरकार के इस आदेश को वन संरक्षण कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि वन रक्षक और संरक्षण कर्मी मुख्य रूप से जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए नियुक्त होते हैं। उन्हें चुनाव ड्यूटी पर लगाना उनके मूल कर्तव्यों से भटकाव है और पर्यावरण सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। NGT ने तत्काल प्रभाव से आदेश पर स्टे दे दिया और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने NGT के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि असम जैसे वन-समृद्ध राज्य में वनकर्मियों की कमी पहले से ही जंगलों की लूट को बढ़ावा दे रही है। चुनाव ड्यूटी के लिए अन्य बलों का उपयोग किया जाना चाहिए। असम सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला असम की पर्यावरण नीतियों और चुनाव प्रबंधन के बीच टकराव को उजागर करता है। NGT की अगली सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।

Pankaj Nath

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