“स्योहारा में ‘फर्जी नैरेटिव’ का खेल.? पुलिस जांच में वायरल आरोप निकले भ्रामक-जमीन विवाद और गंभीर मामलों से जुड़ा मामला”-
“स्योहारा में ‘फर्जी नैरेटिव’ का खेल? पुलिस जांच में वायरल आरोप निकले भ्रामक—जमीन विवाद और गंभीर मामलों से जुड़ा मामला”
बिजनौर पुलिस का दावा: सोशल मीडिया पर फैलाए गए वीडियो/पोस्ट तथ्यहीन; कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए गढ़ी गई कहानी का संदेह
पोस्ट/वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध पहले से ही
दुष्कर्म, रंगदारी एवं छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज।
स्योहारा/बिजनौर | आईरा न्यूज़ नेटवर्क
जनपद बिजनौर के थाना स्योहारा क्षेत्र में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों को लेकर पुलिस ने विस्तृत जांच के बाद बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, वायरल वीडियो और पोस्ट में लगाए गए आरोप “प्रथम दृष्टया भ्रामक, असत्य एवं तथ्यहीन” पाए गए हैं।
पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया कि संबंधित प्रकरण में जिस व्यक्ति की मृत्यु को लेकर आरोप लगाए जा रहे थे, उसकी मौत जनपद फतेहपुर (हरियाणा) में सड़क दुर्घटना में हुई थी। इस संबंध में हरियाणा के संबंधित थाने में पहले से ही विधिक कार्रवाई प्रचलित है।






पुलिस का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मारपीट या सहायता न देने के आरोप पूरी तरह निराधार प्रतीत होते हैं और जांच में ऐसे किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस ने यह भी बताया कि:
पोस्ट/वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध पहले से ही
दुष्कर्म, रंगदारी एवं छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमे दर्ज हैं।
पूरे प्रकरण का मूल विवाद भूमि पर अवैध कब्जा और लगभग ₹2 लाख की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि
चल रही वैधानिक कार्रवाई से बचने और दबाव बनाने के उद्देश्य से भ्रामक सामग्री प्रसारित की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि पोस्ट में जिस व्यक्ति की उपस्थिति का दावा किया गया, वह घटना के समय अस्वस्थ होने के कारण थाने में मौजूद ही नहीं था।
इस आधार पर पुलिस ने वायरल दावों को मनगढ़ंत करार देते हुए उनका पूर्ण खंडन किया है।
पुलिस की अपील
बिजनौर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि:
किसी भी अप्रमाणित या भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट पर विश्वास न करें
केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी को ही सत्य मानें
अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है
यह समाचार पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। मामले से जुड़े सभी आरोप/दावे संबंधित पक्षों के हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
“क्या सोशल मीडिया पर ‘वायरल सच’ वास्तव में सच होता है, या फिर कानून से बचने का नया हथियार?”




























