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बिजनौर में अवैध कटान व ईको-ज़ोन उल्लंघन पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञानपर्यावरणीय क्षति को लेकर UPHRC में दर्ज हुई शिकायत, ₹50 लाख मुआवज़े की मांग

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बिजनौर में अवैध कटान व ईको-ज़ोन उल्लंघन पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
पर्यावरणीय क्षति को लेकर UPHRC में दर्ज हुई शिकायत, ₹50 लाख मुआवज़े की मांग

बिजनौर | आईरा न्यूज़ नेटवर्क
जनपद बिजनौर के नगीना रोड स्थित रवली जहानाबाद क्षेत्र में कथित अवैध खनन, ईको-सेंसिटिव ज़ोन में प्रतिबंधित गतिविधियों और सैकड़ों वर्षों पुराने वृक्षों की अवैध कटाई के गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग (UPHRC), लखनऊ ने संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज कर ली है।


मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. तारिक ज़की द्वारा दायर इस शिकायत को आयोग ने डायरी संख्या 378/IN/2026 के अंतर्गत दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बिजनौर वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की संरक्षणवादी भूमिका के कारण प्रतिबंधित ईको-ज़ोन क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक समय से अवैध खनन, निर्माण तथा बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई जारी रही।
200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पर्यावरणीय विनाश का आरोप
शिकायत के अनुसार रवली–जहानाबाद क्षेत्र में लगभग 200 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर वन संपदा का विनाश किया गया, जिससे स्थानीय पर्यावरण, भू-जल स्तर, वायु गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। आरोप है कि इस दौरान कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
‘मास ह्यूमन राइट्स वॉयलेशन’ का मामला
डॉ. ज़की ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण और जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन बताते हुए इसे Mass Human Rights Violation की श्रेणी में रखा है। शिकायत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वन अधिनियम एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।
₹50 लाख मुआवज़ा व SIT जाँच की मांग
मानवाधिकार आयोग से मांग की गई है कि—
पूरे मामले की स्वतंत्र SIT जाँच कराई जाए
दोषी वन अधिकारियों व संबंधित लोगों पर FIR व विभागीय कार्रवाई हो
प्रभावित क्षेत्र में पर्यावरणीय पुनर्स्थापन कराया जाए
पीड़ित जनसमुदाय को ₹50,00,000/- (पचास लाख रुपये) का मुआवज़ा प्रदान किया जाए
आयोग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
UPHRC द्वारा शिकायत स्वीकार किए जाने के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इस गंभीर पर्यावरणीय एवं मानवाधिकार उल्लंघन मामले में आगे क्या ठोस निर्देश जारी करता है।

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