झोलाछाप के इलाज से नवजात की मौत का मामला-मानवाधिकार आयोग में शिकायत पंजीकृत-प्रशासनिक लापरवाही और अवैध अस्पतालों पर उठे गंभीर सवाल
झोलाछाप के इलाज से नवजात की मौत का मामला-मानवाधिकार आयोग में शिकायत पंजीकृत-
प्रशासनिक लापरवाही और अवैध अस्पतालों पर उठे गंभीर सवाल
बिजनौर/धामपुर।
धामपुर क्षेत्र में एक झोलाछाप/अवैध चिकित्सक द्वारा संचालित अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के मामले में अब राज्य मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश (SHRC) ने संज्ञान ले लिया है। आयोग ने मामले को डायरी संख्या 276/IN/2026 एवं केस/फाइल संख्या 674/24/17/2026 के अंतर्गत पंजीकृत कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. तारिक ज़की द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धामपुर क्षेत्र में वर्षों से बिना पंजीकरण, बिना मान्यता और बिना योग्य चिकित्सकों के अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिन पर स्वास्थ्य विभाग की कथित मेहरबानी बनी हुई है।

शिकायत में कहा गया है कि इलाज के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई, जो केवल चिकित्सकीय लापरवाही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के विरुद्ध संगठित अपराध है। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के बाद भी संबंधित किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नही हुई।
हालांकि मानवाधिकार आयोग ने मामला दर्ज कर लिया है इसे लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में नाराज़गी है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं होगी, तो यह अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का खुला उल्लंघन है।
शिकायत में जिला स्वास्थ्य विभाग, CMO कार्यालय एवं स्थानीय प्रशासन पर यह आरोप भी लगाया गया है कि समय-समय पर निरीक्षण न करना, शिकायतों को दबाना और अवैध अस्पतालों को संरक्षण देना इस मौत की बड़ी वजह है।
शिकायतकर्ता डॉ तारीक़ ज़की ने आयोग से मांग की है कि:
मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए
अवैध अस्पतालो को तत्काल सील किया जाए
दोषी झोलाछाप चिकित्सक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो
पीड़ित परिवार को अंतरिम मुआवज़ा दिया जाए
यह मामला अब केवल एक परिवार के दुख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवालिया निशान बन चुका है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे अवैध अस्पताल और निर्दोष जानें लेते रहेंगे।























