ग्राम हफीजाबाद सिरकी में पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार का मामला-UPHRC मानवाधिकार आयोग मे शिकायत दर्ज !!
बिजनौर: ग्राम हफीजाबाद सिरकी में पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार, यूपी मानवाधिकार आयोग ने शिकायत दर्ज की
बिजनौर (उत्तर प्रदेश):
जनपद बिजनौर के ब्लॉक अलेहपुर, धामपुर अंतर्गत ग्राम हफीजाबाद सिरकी में पंचायत स्तर पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग, लखनऊ ने शिकायत स्वीकार कर ली है।
मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. तारिक ज़की, जनरल सेक्रेटरी, World Accreditation of Human Rights द्वारा सार्वजनिक हित में दर्ज कराई गई शिकायत को आयोग ने डायरी संख्या 397/IN/2026 के अंतर्गत पंजीकृत किया है।

सरकारी विकास निधियों के दुरुपयोग का आरोप
शिकायत के अनुसार ग्राम प्रधान एवं संबंधित पंचायत अधिकारियों द्वारा सरकारी विकास योजनाओं की धनराशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि:
ग्रामीणों को खर्च का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी जानबूझकर रोकी गई
पारदर्शिता और जवाबदेही का पूर्ण अभाव रहा
मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला
शिकायत में कहा गया है कि इस कथित भ्रष्टाचार से ग्रामीण नागरिकों के सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) और समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) सीधे प्रभावित हुआ है।
ग्रामीणों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से शिकायत उठाए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी जांच या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक निष्क्रियता उजागर होती है।
आयोग से की गई प्रमुख माँगें
मानवाधिकार आयोग से निम्न बिंदुओं पर हस्तक्षेप की माँग की गई है:
प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच
ग्राम प्रधान व संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कठोर कानूनी व विभागीय कार्रवाई
पंचायत के समस्त विकास कार्यों और वित्तीय अभिलेखों का विशेष ऑडिट
सूचना का अधिकार अधिनियम के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई
पीड़ित ग्रामीणों को उचित मुआवज़ा/राहत
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश
मीडिया रिपोर्ट भी संलग्न
शिकायत के साथ दैनिक समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ (दिनांक 18 जनवरी 2026) में प्रकाशित समाचार की प्रति भी संलग्न की गई है, जिससे मामले की गंभीरता और सार्वजनिक सरोकार स्पष्ट होता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग इस संवेदनशील प्रकरण में कितनी शीघ्रता से जांच कर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करता है।























