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स्टीविया की खेती उपयोगी व लाभदायक – धर्मजीत मानव

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AIRA NEWS NETWORK – कृषि की नयी विधा समय की मांग है तथा उन्नति व आत्मनिर्भरता का द्योतक है।परम्परागत कृषि के साथ ही मिट्टी व पानी के अनुसार नवोन्मेषी खेती कृषकों को नये विकल्प तैयार करती है।ऐसे ही स्टीविया जिसे मधुपत्र व मीठी तुलसी या मीठी जड़ी भी कहते हैं।इसका औषधीय उपयोग विश्व प्रसिद्ध है।खानपान की बदलती आदतें व व्यस्त जीवन शैली मोटापा, मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को जन्म दे रहा है।

ऐसे में मीठी तुलसी की महत्ता वैश्विक कृषि बाजार में बढ़ रही है।यह चीनी का स्थानापन्न तथा बेहतर विकल्प है।इसके पत्तों से निकलने वाले यौगिक चीनी से लगभग 300 गुना मिठास देता है।यह एक सुरक्षित विकल्प है।मधुमेह रोगियों के लिये रामबाण औषधि है।यह इन्सुलिन को संतुलन करता है।स्टीविया की खेती पर्यावरण व कृषक अनुकूल है।सर्वप्रथम जिस खेत में स्टीविया की खेती करना हो तो उसकी 1-2 सेमी. गहरी जुताई करते हैं।खेत को समतल बनाते हैं।जैविक खाद को मिलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लेते हैं।

जैविक खाद में केचुआ खाद,गोबर आदि बेहतर विकल्प हैं।अब खेत में मेड़ तैयार करते हैं जिससे पंक्तिवार स्टीविया के पौधे निश्चित दूरी में लगा सके।रोपाई के बाद सिंचाई अति आवश्यक होता है।टपक सिंचाई विधि से सिंचाई जल संरक्षण व पौधे की बेहतर तैयारी के लिये आवश्यक है।टिश्यू कल्चर से तैयार पौध की महत्ता दी जानी चाहिए ।

हम बिना रासायनिक खाद का उपयोग किये भी नियोजित ढंग से स्टीविया की खेती कर सकते हैं।पौधों में गोमूत्र व नीम ऑयल का छिड़काव किया जा सकता है। चूंकि यह बहुवर्षीय पौधा है।अत:रोपण से पहले मिट्टी को अच्छे ढंग से तैयार करनी चाहिए ।पहले वर्ष में 03 कटिंग व दूसरे वर्ष से प्रत्येक 03 माह में कटिंग की जा सकती है।साथ ही 03 से 05 साल तक इसकी कटिंग की जा सकती है।कटिंग करते समय पौधे का 14-20 सेमी का हिस्सा छोड़ कटिंग करते हैं।फूल आने से पहले ही समयबद्ध कटिंग पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि पौधें पर पुष्प आने के बाद मीठास कम होती जाती है।

यह बहुत ही उपयोगी व लाभदायक खेती है।इसके पत्ती को पीसकर स्वादानुसार चाय/कॉफी/शरब़त,दूध या मीठे में डालकर कैलोरी रहित मिठास का आनंद लिया जा सकता है।एक ओर जहां बिना रासायनिक खाद से इसकी खेती की जा सकती है तो वहीं दूसरी ओर इसका बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है।सरकार इस पर सब्सिडी भी दे रही है तथा बहुवर्षीय पौधे के साथ ही औषधीय व पर्यावरण हितैषी पौधा है,जो कृषकों की आय बढ़ाने में लाभदायक सिध्द हो सकता है ।

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