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NHM की ‘नीति’ या गर्भवती महिलाओं पर संस्थागत हमला..? -40,000 महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ पर मानवाधिकार आयोग में मामला दर्ज

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NHM की ‘नीति’ या गर्भवती महिलाओं पर संस्थागत हमला? 40,000 महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ पर मानवाधिकार आयोग में मामला दर्ज
मुरादाबाद।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत अल्ट्रासाउंड वाउचर/भुगतान व्यवस्था बंद किया जाना अब महज़ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बन चुका है। मुरादाबाद जनपद की लगभग 40,000 गर्भवती महिलाओं को अनिवार्य चिकित्सीय जांच से वंचित किए जाने के इस गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (UPHRC) ने शिकायत दर्ज कर डायरी नंबर 571/IN/2026 जारी कर दिया है।


वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के मुरादाबाद मंडल के डायरेक्टर संदीप सिंह का शिकायत में आरोप है कि NHM के अंतर्गत निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू ₹425 प्रति जांच की व्यवस्था को बिना किसी वैकल्पिक, प्रभावी और सुरक्षित व्यवस्था के अचानक बंद कर दिया गया। इसका सीधा असर गरीब, ग्रामीण और संवेदनशील गर्भवती महिलाओं पर पड़ा है, जिन्हें या तो घंटों कतार में खड़े रहने को मजबूर किया जा रहा है या फिर 40–50 किलोमीटर दूर शहरों तक भटकने पर विवश किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर निजी केंद्रों पर ₹1000 से ₹2000 तक अवैध वसूली के आरोप सामने आ रहे हैं। यह स्थिति केवल Institutional Negligence नहीं, बल्कि Criminal Apathy और Dereliction of Duty की श्रेणी में आती है।
मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत में शिकायकर्ता संदीप सिंह ने स्पष्ट कहा गया है कि यह मामला अनुच्छेद 21 (जीवन व स्वास्थ्य का अधिकार), अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के विशेष संरक्षण) का घोर उल्लंघन है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही हाल रहा तो राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR), शिशु मृत्यु दर (IMR) और जटिल गर्भावस्था के मामलों में तेज़ वृद्धि तय है।
शिकायतकर्ता संदीप सिंह ने आयोग से मांग की है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, NHM और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए तथा अल्ट्रासाउंड व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बहाल कराया जाए।
अब सवाल यह नहीं है कि व्यवस्था कब सुधरेगी—
सवाल यह है कि अगर किसी गर्भवती महिला या नवजात को नुकसान हुआ, तो उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

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