AIRA NEWS NETWORK – बक्सवाहा जंगल की कटाई को लेकर NGT ने अंतरिम आदेश दिया, जिसमें मुख्य वन कंसर्वेटर, म.प्र. को आदेशित किया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि बक्सवाहा से अभी कोई भी पेड़ बिना Forest Clearance के नहीं काटा जायेगा।
बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ने कहा कि साथियों, यह हम सब की पहली जीत है, लेकिन अभी हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, अभी भी लम्बा संघर्ष बाकी है! यदि हम एकजुट रहे तो कोई भी बक्सवाहा से एक पेड़ भी नहीं काट पायेगा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भोपाल की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के छतरपुर जिले के बक्सवाहा में हीरा खनन के लिए वन विभाग की अनुमति के बिना एक भी पेड़ न काटा जाए। न्यायिक सदस्य न्यायधीश एस के सिंह और विशेषज्ञ सदस्य कुमार वर्मा ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जबाब देने को कहा है। अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
एनजीटी ने आदेश में कहा है कि सरकार को वन संरक्षण कानून के तहत एक्सपर्ट की कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही हीरा खनन कंपनी एक्सेल इंडस्ट्रीज को शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने का भी आदेश दिए हैं। एनजीटी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये एक घंटे तक चली सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जंगलों में चट्टानों पर चित्र मिले हैं, जो 25 से 30 हजार साल पुराने हैं। वहीं मामले में दूसरे याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि जंगल काटने से वहां रह रहे वन्य जीवों को दिक्कतें आएगी। कंपनी के वकील ने न्यायालय को बताया कि बक्सवाहा के जंगल में कंपनी ने काम शुरू नहीं किया है, जिस पर एनजीटी ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।


















