वाराणसी/उत्तरप्रदेश

साल 2025 भारतीय कृषि में आत्मनिर्भरता,रिकॉर्ड उत्पादन और किसानों के भरोसे का नया युग

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वाराणसी :- साल 2025 भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बनकर उभरा है | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से अधिक समय में किए गए संरचनात्मक सुधारों का समेकित परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है जो कृषि व्यवस्था कभी कम उत्पादकता,मूल्य अस्थिरता और आयात निर्भरता से जूझ रही थी वह आज रिकॉर्ड उत्पादन,वैज्ञानिक नवाचार, सुनिश्चित आय और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है |

2025 की खास बात यह रही कि कृषि सुधार बिखरी योजनाओं से आगे बढ़कर केंद्रित और मिशन-आधारित दृष्टिकोण में तब्दील हुए | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) इसका प्रमुख उदाहरण है जिसे केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया | यह योजना 100 कम प्रदर्शन वाले जिलों पर केंद्रित है और 1.7 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखती है 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट के साथ,यह योजना सिंचाई, भंडारण,प्रशिक्षण,तकनीक और संस्थागत ऋण को एकीकृत कर जिला स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है |

दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी 2025 निर्णायक वर्ष रहा,11,440 करोड़ रुपये के परिव्यय से शुरू किए गए दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का लक्ष्य 2030-31 तक 350 लाख टन उत्पादन हासिल करना है | पहली बार तुअर,उड़द और मसूर किसानों को चार वर्षों तक 100 प्रतिशत एमएसपी पर खरीद की गारंटी दी गई जिससे करीब दो करोड़ किसानों की आय स्थिर हुई और पोषण सुरक्षा को बल मिला |

कृषि और उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने के लिए कपास मिशन की शुरुआत की गई इससे कपास उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ भारत के वस्त्र और एमएसएमई क्षेत्र को स्थायी कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद मिली जिससे कृषि को वैश्विक बाजारों से जोड़ा गया | इन सुधारों का असर रिकॉर्ड उत्पादन के रूप में सामने आया,वर्ष 2024-25 में भारत ने 357.73 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन कर अब तक का सर्वोच्च स्तर हासिल किया | चावल,गेहूं,दालें और तिलहन सभी में ऐतिहासिक उत्पादन दर्ज हुआ | 2025 की पहली तिमाही में कृषि क्षेत्र ने 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती कृषि अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ |

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी प्रतीकात्मक घोषणा से आगे बढ़ाकर वास्तविक आय सुरक्षा का साधन बनाया गया | उत्पादन लागत के डेढ़ गुना एमएसपी सिद्धांत को सख्ती से लागू करते हुए खरीद और भुगतान में अभूतपूर्व वृद्धि की गई जिससे किसानों का भरोसा मजबूत हुआ | विज्ञान और सतत विकास पर फोकस ने 2025 को वैश्विक स्तर पर भी खास बनाया |

जीनोम-संपादित चावल की किस्मों का विकास और सौर ऊर्जा आधारित कृषि पंपों की रिकॉर्ड स्थापना,हरित और आधुनिक कृषि की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं | कुल मिलाकर साल 2025 भारतीय कृषि के लिए आत्मविश्वास,आत्मनिर्भरता और स्थिर विकास का प्रतीक बन गया है जो विकसित भारत के लक्ष्य की मजबूत नींव रखता है ||

Sallauddin Ali

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