संत का जीवन तो है लालिमा पूर्व दिशा की,संत का काम तो सारी धरती को जगाना है

वाराणसी :- भारतीय संस्कृति सुर्योदय कि संस्कृति है जगाने की संस्कृति है उपरोक्त उदगार वातसल्य मूर्ति कवि हृदय निर्यापक श्रमण मुनिश्री समता सागर महाराज ने आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज के द्वितीय समाधी दिवस के अवसर पर भगवानश्री पारसनाथ स्वामी की जन्मस्थली भेलुपुर वाराणसी में आयोजित धर्म सभा में व्यक्त किये मुनिश्री ने कहा कि संत का जीवन न केवल जीने का बहाना है संत का जीवन न केवल पांखों का खजाना है संत का जीवन तो है लालिमा पूर्व दिशा की,संत का काम तो सारी धरती को जगाना है | मुनि श्री ने कहा कि आज की यह सभा काशी बनारस के विद्वानों की सभा है यंहा पर न केवल जैन विद्वान बल्कि कयी बड़े बड़े जैनेत्तर विद्वान भी हुये है उन्होंने कहा कि प्रातः काल हम लोग हरिश्चंद्र घाट पर भी गये और बासू पूज्य सागर महाराज ने तो आज दोपहर में जाकर ध्यान किया |
मुनिश्री कहा कि जिस घटना को हम लोग बचपन से सुनते चले आ रहे है उस स्थान पर जब हम लोग गये तो वंहा के महन्तों ने हम लोगों का स्वागत किया मुनिश्री ने कहा कि यह सामान्य सभा नहीं वल्कि विद्वानों की नगरी काशी वनारस नगरी की धर्मसभा है उन्होंने कहा कि गुरवर के गुरुवर आचार्य ज्ञान सागर महाराज एवं गणेश प्रसाद जी वर्णी जी का भी संबंध रहा है | मुनिश्री ने कहा कि इस बनारस नगरी का कई विद्वानों ने अपने ग्रंथों तथा पुस्तकों में उल्लेख किया है उन्होंने भदैनी में जैन घाट पर भगवान श्री पारसनाथ की वंदना की सामने से गंगा बह रही थी यंहा पर सामायिक करते हुये मन में चिंतन चल रहा था यंहा से निकलने वाली गंगा तन की तपन और शरीर को प्रछालन तो करती ही है साथ ही साथ शांति उत्पन्न करती है वंही काशी नगरी में ज्ञान की गंगा मन को प्रछालित करती है |
मन को शांत करती है मुनिश्री ने कहा कि ज्ञान के इस क्षेत्र में इतना ही कहना चाहता हुं विद्या लाती है नई नई कल्पना और कल्पना लाते है नये-नये विचार और नये- नये विचारों से मिलता है नया नया ज्ञान और ज्ञान बनाता है हम सबको महान मुनिश्री ने कहा कि जितना भी ज्ञान विदेशों में गया है वह सिर्फ और सिर्फ भारत से ही गया है | मुनिश्री ने कहा कि हम सभी इस संस्कृति को पाकर के गौरवांवित है उन्होंने कहा कि यंहा वनारस में वैदिक संस्कृति और श्रमण संस्कृति का प्रवाह देखने को मिलता है ये दौनों प्रवाह यंहा पर ज्ञान की गंगा को प्रवाहित कर रहे है,मुनिश्री ने कहा कि अभी कुलपति कह रहे थे कि भारतीय शिक्षा नीति में परिवर्तन करने का जब विचार चल रहा था तो वह उस समिती की वह अध्यक्षता कर रहे थे |
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रपति कोविंद एवं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आचार्यश्री के बहुत करीबी थे यह लोग कोई दिखावे के नहीं थे वह समय समय पर जाकर गुरुवर से निर्देश लेते थे | मुनिश्री ने भोपाल में आचार्यश्री और प्रधानमंत्री जी के बीच लगभग तीस मिनट की चर्चा हुई उपरोक्त चर्चा के बाद जब पत्रकारों ने गुरुदेव से पूंछा कि क्या चर्चा हुई तो गुरुदेव ने कहा कि जिनको जो बताना जो जरुरी था उनको बता दिया है उन्होंने कहा कि आपको क्या संदेशा दैना है तो गुरुदेव ने कहा कि वह संदेश भी आप लोगों तक पहुंच जाऐगा मुनिश्री ने कहा कि गुरवर इतने अधिक निष्प्रही संत थे कि उनको दुनिया दारी से कोई लेना देना नहीं होता था कोई पव्लिसिटी नहीं ऐसा व्यक्तित्व गुरुदेव विद्यासागर महाराज का राष्ट्र के संरक्षण के लिये तथा बच्चों के भविष्य के लिये तथा उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिये था मुनिश्री ने अमरकंटक का प्रसंग सुनाते हुये कहा कि गुरवर के साथ था उधर पर भी सभी मठों के संत गुरुदेव के दर्शन करने तथा मार्गदर्शन लेंने आते थे |
इस अवसर पर मुनिश्री पवित्र सागर महाराज,मुनिश्री पूज्यसागर महाराज मुनि अतुल सागर महाराज ने सम्बोधन देते हुये आचार्य गुरुदेव के प्रति विनयांजलि अर्पित करते हुये सारगर्भित विचार रखे | इस अवसर पर आर्यिका रत्न गुरुमति माता जी काफी भावुक हो गई उन्होंने कहा कि वर्तमान में अपने आप जिन्होंने तत्व का परिचय किया है उनके परिणाम सार्थक आये है आर्यिकारत्न दृणमति माताजी ने अपने विचारों का प्रक्षेपण कर गुरूदेव के प्रति समर्पण एवं अपनी संस्कृति के निष्टा व्यक्त की राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्या वाणी ने बताया उपरोक्त कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महामुनिराज एवं वर्तमान आचार्य समयसागर महाराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ | तत्पश्चात आचार्य गुरुदेव की भक्तीभाव और श्रद्धा के साथ पूजन की गई | बाल ब्र.मनोज भैया ललितपुर ने अपनी स्वर लहरी के साथ प्रस्तुती करण दिया जिसमें बनारस जैन समाज की सभी महिला मंडलों ने विशेष भेषभूषा के साथ अर्घ समर्पित कराये एवं प्रस्तुतियां दी एवं विनयांजलि सभा में बीएचयू महाविद्यालय के कुलपति एवं काशी संस्कृत महा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं लेक्चरार एवं बड़ी संख्या में विद्वान उपस्थित थे |
कार्यक्रम का संचालन डा.अमित जैन ने किया | समाज के सदस्य आरसी जैन, संजय जैन,अजित जैन,अरुण जैन,बिनोद जैन,राकेश जैन,सौरभ जैन,सुधीर जैन, पोद्दार आदि बड़ी संख्या मे समाज के लोग उपस्थित हुए ||






