शंकराचार्य बदसलूकी मामला: अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचा विवाद, संतों के लिए SOP बनाने की मांग

प्रयागराज/नई दिल्ली । माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और वेदपाठी बटुकों के साथ पुलिस की कथित बर्बरता का मामला अब देश की शीर्ष अदालत में पहुंच गया है। इस घटना के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर मांग की गई है कि भविष्य में धर्माचार्यों और धार्मिक व्यक्तियों के साथ पुलिस कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित की जाए।
याचिका में पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे सवाल
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता उज्ज्वल गौर द्वारा दायर इस याचिका में मौनी अमावस्या के दिन घटी घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
याचिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
मानवीय गरिमा का हनन: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि पुलिसकर्मियों ने नाबालिग वेदपाठी छात्रों की शिखा पकड़कर उन्हें घसीटा और सार्वजनिक रूप से उनकी पिटाई की।
अमानवीय व्यवहार: एक साधु के वस्त्र फाड़ने की घटना को बेहद शर्मनाक और अलोकतांत्रिक बताया गया है।
संवैधानिक उल्लंघन: याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कृत्य संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का खुला उल्लंघन है।
“धार्मिक व्यक्तियों के लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण पुलिस प्रशासन अक्सर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करता है। एक सभ्य समाज में संतों के साथ ऐसा व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं है।” — याचिका का अंश
क्या है याचिकाकर्ता की मुख्य मांग?
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दे कि:
धार्मिक व्यक्तियों और संतों से जुड़े मामलों में पुलिस के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश (SOP) जारी किए जाएं।
ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया जाए।
दोषी पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
धर्मांतरण और धर्म संसद: मामला और गरमाया
प्रयागराज माघ मेले से प्रस्थान करने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जाने का मन बना लिया है। अनशन खत्म करने के बाद उन्होंने काशी से बड़े आंदोलन का बिगुल फूंका है।
10–11 मार्च को धर्म संसद: महाशिवरात्रि से ठीक पहले लखनऊ में एक भव्य ‘धर्म संसद’ बुलाई गई है।
हिंदू की परिभाषा: शंकराचार्य के इस बयान ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है कि, “इसी संसद में तय होगा कि वास्तव में हिंदू कौन है और कौन नहीं।”
निष्कर्ष: जहाँ एक ओर कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर संत समाज सड़कों पर उतरने और वैचारिक मंथन के जरिए प्रशासन को घेरने की तैयारी में है।






