वाराणसी/उत्तरप्रदेश

विश्व के आधे लोग पर्वतीय क्षेत्रों पर निर्भर: पद्मश्री डॉ. एकलब्य शर्मा

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· पद्मश्री डॉ. एकलब्य शर्मा ने दिया 26वां प्रो. एसपी राय चौधरी मेमोरियल व्याख्यान

वाराणसी, 24.02.2026: प्रो. एसपी राय चौधरी मेमोरियल फाउंडेशन के तत्वावधान में आज 26वां प्रो.एसपी राय चौधरी मेमोरियल व्याख्यान एसएस जोशी हाल, रसायन विज्ञान विभाग, में आयोजित किया गया। पद्मश्री सम्मानित पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. एकलब्य शर्मा, एफएनए, (पर्यावरण और पारिस्थितिकी में शोध के लिए अशोका ट्रस्ट, बेंगलूरु), ने “संवेदनशीलता से सुदृढ़ता की ओर: हिंदू कुश हिमालय के भविष्य पर पुनर्विचार” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालय क्षेत्र की पर्यावरणीय चुनौतियों, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर गहन चर्चा की।

व्याख्यान में डॉ. शर्मा ने हिंदू कुश हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन प्रभाव, अनुकूलन और प्रकृति-आधारित समाधानों को बताया। हिंदू कुश हिमालय (एचकेएच) क्षेत्र, जिसे अक्सर “तीसरा ध्रुव” कहा जाता है क्योंकि यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर बर्फ के विशाल भंडार का घर है, लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि एचकेएच क्षेत्र दुनिया के 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट में से चार को समाहित करता है, जहां 39% क्षेत्र संरक्षित है। यह अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान के क्षेत्रों में फैला हुआ है तथा 25 करोड़ पर्वतीय निवासियों और 2 अरब से अधिक मैदान के लोगों को प्रभावित करता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जल सुरक्षा, हिममंडल संरक्षण के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता बताई। इस क्षेत्र में 1000 बोलियाँ हैं, जिनमें से 70% विलुप्ति के कगार पर हैं।

बाढ़, भूस्खलन और हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) जैसे खतरे बढ़ रहे हैं, जहां 200 उच्च-जोखिम वाली हिमनदीय झीलें पहचानी गई हैं। व्याख्यान में उन्होंने भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) के लिए व्यापक ग्राउंड ज़ीरो मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक अनिश्चितताओं को कम किया जा सके और सतत विकास पथ प्रस्तावित किए जा सकें।

कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होने अपने संबोधन में कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महान विभूतियों को स्मरण करना आवश्यक है, जिनमें से एक प्रो. एस. पी. राय-चौधरी थे। प्रो. चतुर्वेदी ने इस व्याख्यान को “विचारोत्तेजक” बताते हुए कहा कि नेतृत्वकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के बीच सशक्त समन्वय के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि शोधकर्ताओं का दायित्व है कि वे व्यापक समाज को निर्णय लेने के लिए आवश्यक प्रासंगिक पर्यावरणीय जानकारी प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाएं। कुलपति ने डॉ. एकलब्य शर्मा को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित भी किया।

प्रो. एस. पी. राय-चौधरी मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. राजीव रमन, जंतु विज्ञान विभाग, विज्ञान संस्थान, ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने प्रो. एसपी राय चौधरी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक ऐसे वैज्ञानिक के रूप में याद किया, जिन्होंने भारत में ड्रोसोफिला जेनेटिक्स और साइटोजेनेटिक्स की नई शाखा स्थापित की, जो राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। प्रो. एसपी राय चौधरी मेमोरियल फाउंडेशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वर्तमान के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मुद्दों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित करना है।

प्रो. एस. पी. राय-चौधरी मेमोरियल फाउंडेशन के सचिव प्रो. मधु जी तापड़िया, जंतु विज्ञान विभाग, विज्ञान संस्थान, ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया।

फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष डॉ. गौरव के. पांडेय, सहायक प्रोफेसर, विज्ञान संस्थान, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम का संचालन देबोश्री द्वारा किया गया। इस अवसर पर विज्ञान संस्थान के निदेशक, प्रो. संजय कुमार, डीन प्रो. राजेश कुमार श्रीवास्तव, प्रो. एससी लाखोटिया, प्रो. आरके अस्थाना, प्रो. आरएन खरवार, प्रो. मर्सी जैकब, प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, प्रो. एसपी राय चौधरी मेमोरियल फाउंडेशन के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और विभिन्न संकायों के शिक्षक उपस्थित रहे।

Sallauddin Ali

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