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वर्दी पर कानून भारी या कानून पर वर्दी..? सड़क सुरक्षा माह का कड़वा सच

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बिजनोर / स्योहारा
सड़क सुरक्षा माह के नाम पर रैलियाँ, पोस्टर और शपथ समारोह तो आयोजित हो रहे हैं —
लेकिन सवाल यह है कि ये नियम केवल आम जनता के लिए ही क्यों..?


जब कानून लागू करने वाले हाथ स्वयं कानून तोड़ते दिखें, तो वह सुरक्षा नहीं बल्कि वर्दी का अहंकार कहलाता है।
कानून क्या कहता है?
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 के अनुसार:
दोपहिया वाहन चालक और सवार — दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य है
लोक सेवकों या पुलिसकर्मियों को कोई विशेष छूट नहीं दी गई है
फिर सवाल उठता है —
अगर आम आदमी का चालान कटता है,
तो बिना हेलमेट दरोगा जी का क्यों नहीं?
दोहरे मापदंडों पर जनता में आक्रोश की स्थिती है
स्योहारा नगर सहित कई चौराहों पर पुलिसकर्मियों द्वारा बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने की घटनाएँ सामने आई हैं।
ये दृश्य उस समय और अधिक चुभते हैं, जब उसी स्थान पर आम नागरिकों से भारी जुर्माना वसूला जा रहा हो।
यह स्थिति प्रशासन की:
निष्पक्षता
जवाबदेही
और कानून के समान अनुप्रयोग
— तीनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
नागरिकों का कहना है कि:
नियम उल्लंघन पर आम जनता से सख़्ती
लेकिन अपने ही अधिकारियों पर पूर्ण मौन
यह सार्वजनिक विश्वास के साथ छल है।
जागरूक नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
✔️ नियम तोड़ने वाले पुलिसकर्मियों का भी ऑनलाइन चालान किया जाए
✔️ उनके विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ हो
✔️ सड़क सुरक्षा को इवेंट नहीं, ईमानदार व्यवस्था बनाया जाए
“प्रशासनिक जवाबदेही लोकतंत्र की बुनियाद है।
यदि रक्षक ही भक्षक बनेंगे,
तो जनता में कानून के प्रति सम्मान समाप्त हो जाएगा।”

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