राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लगाया 25 हज़ार का जुर्माना, वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय सलाहकार मानवाधिकार पक्षकार राजीव कुमार शर्मा की सच्चाई पर लगी मुहर

आईरा न्यूज़ नेटवर्क
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4 साल की जंग के बाद जीत:
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लगाया 25 हज़ार का जुर्माना, वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय सलाहकार मानवाधिकार पक्षकार राजीव कुमार शर्मा की सच्चाई पर लगी मुहर
साहिबाबाद/गाज़ियाबाद
मानवाधिकार संघर्ष की राह पर चार साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद अंततः वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय सलाहकार राजीव कुमार शर्मा की सत्य की जीत हुई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाते हुए इसे राजीव कुमार शर्मा को मुआवजे के रूप में अदा करने का आदेश दिया।

यह मामला उस समय शुरू हुआ जब साहिबाबाद पुलिस ने एक आईएएस अधिकारी को बचाने और राजीव शर्मा का मनोबल तोड़ने के उद्देश्य से उनके खिलाफ रंगदारी का झूठा मुकदमा दर्ज किया था। इस साजिश में तत्कालीन दरोगा विमल कुमार यादव की भूमिका सामने आई, जिसने कुछ लोगों के उकसावे पर झूठी रिपोर्ट दर्ज करने की संस्तुति की थी।

आयोग का बड़ा फैसला
मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन थी। आदेश के मुताबिक सरकार को यह 25 हज़ार रुपये की धनराशि राजीव शर्मा को अदा करनी पड़ी, जिसे बाद में दरोगा विमल कुमार यादव के वेतन से वसूला गया।
“सत्य की जीत हुई, झूठ बेनकाब”
फैसले के बाद राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उन सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जीत है जो न्याय और सत्य की राह पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “यह निर्णय साबित करता है कि चाहे साजिश कितनी भी गहरी क्यों न हो, अंततः सच की जीत होती है।”
पुलिस-माफिया गठजोड़ पर सवाल
यह मामला एक बार फिर उस गठजोड़ को उजागर करता है जिसमें पुलिस और प्रभावशाली लोग मिलकर ईमानदार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिश करते हैं। लेकिन राजीव शर्मा की दृढ़ इच्छाशक्ति और कानूनी संघर्ष ने इस षड्यंत्र को नाकाम कर दिया।
✍️ राजीव कुमार शर्मा: मानवाधिकार संघर्ष की एक मजबूत आवाज
राजीव कुमार शर्मा पिछले दो दशकों से मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय सलाहकार के रूप में उन्होंने कई मामलों में न सिर्फ पीड़ितों की आवाज को उठाया है बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लगातार संघर्ष किया है।
उनके प्रयासों से कई संवेदनशील मामलों में पीड़ितों को न्याय मिला है और कई बार सरकारी तंत्र की लापरवाहियों को उजागर किया गया है। कठिन परिस्थितियों और साजिशों के बावजूद राजीव शर्मा हमेशा “मानवाधिकार सर्वोपरि” की सोच के साथ खड़े रहे हैं। यही वजह है कि उन्हें मानवाधिकार जगत में एक दृढ़ और साहसी कार्यकर्ता के रूप में पहचाना जाता है।





