ये जो जिम्मेदार अधिकारी हैं ये किसको खुश करने के लिए चलाते हैं अभियान

होता है सिर्फ़ फोटो सेशन फिर मामला हो जाता है ढाक के तीन पात वाला।
अभियान के कुछ ही देर बाद हालात यथा स्थिति वाले हो जाते हैं,
मेयर साहिबा और नगर आयुक्त जिस तरह टीम के साथ अभियान चलाते दिखते हैं, जिसकी फ़ोटो क्लिक होती है, पेपर्स खबर छापते हैं, लोकल चैनल बड़ी बड़ी तारीफों के कसीदे गढ़ते हैं, उसके चंद घंटों बाद या दूसरे ही दिन हालात फ़िर पहले जैसे हो जाते हैं, आख़िर ऐसा क्यों!?
लाटूश रोड, हीवेट रोड, हैदरगंज, पाण्डे गंज, नक्खास, अकबरी गेट, आलमबाग, कैसरबाग, अमीनाबाद चारबाग में तो जाम के झाम में फंस कर ट्रैफिक रेंगता ही रहता है, और “चौक” क्षेत्र के क्या ही कहने वो तो पूरी तरह लगभग “चोक” ही रहता है।
इसी के साथ पूरे लखनऊ की क्या बात की जाए सिर्फ़ नगर निगम मुख्यालय के इर्द गिर्द ही भयंकर जाम और अतिक्रमण की स्थिति बनी रहती है जिसमें बड़ी भूमिका कार बाज़ार और शर्मा चाय वाले निभाते हैं।
न किसी की जिम्मेदारी तय होती है और न ही कोई अधिकारी जिम्मेदारी लेता है
और अधिकारी “जो लेता है” वो सबको पता है कि जिस कारण कोई ठोस एक्शन नहीं होता है।
आखिर किसको खुश करने के लिए चलाए जाते हैं ये अभियान।





