वाराणसी/उत्तरप्रदेश

मुनिश्री समता सागर महाराज स संघ भदैनी घाट पर स्यादवाद महाविधालय पहुंचे

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वाराणसी:- संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समय सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज स संघ भदैनी घाट स्थित भगवान सुपार्श्वनाथ के चार कल्याणक भूमी पर बने जिनालय के दर्शन किये एवं स्यादवाद महाविधालय का अवलोकन किया इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा जैसे पानी का संयोग माटी को मिलता है तो माटी भीतर और बाहर भीग जाती है उसी प्रकार गुरुओं के संयोग से श्रावक अंदर और बाहर भीग जाता है | उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनिश्री समता सागर महाराज ने प्रातः कालीन धर्मसभा में व्यक्त किये उन्होंने कहा कि श्रमण और श्रावक दौनों धर्म रथ को आगे बढ़ाते है यदि एक भी पहिया कमजोर हूआ तो यह धर्म रथ आगे नहीं बढ़ सकता |

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनिसंघ ने स्यादवाद महाविद्यालय भदैनी जैन घाट की ओर प्रस्थान किया तो प्रशासन पूरी व्यवस्था बना रहा था सभी चौराहे पर लोग मुनिसंघ को निहार रहे थे वंही मुनिसंघ अपने रास्ते को देख आगे बड़ रहे था मध्यान्ह में विहार करते हुये मुनिश्री ने कहा कि बिना औपचारिकता के साथ विचारों का आदान प्रदान हो रहा है उन्होंने समाज सेवीओं को कहा कि ज्ञान के केन्द्र का विकास करें | यह स्यादवाद महाविधालय में गणेश प्रसाद बर्णी और पंडित भूरामल जो कि आचार्य ज्ञानसागर महाराज के नाम से प्रसिद्ध हुये तथा बासू पूज्य सागर महाराज का ब्रहम्चारी अवस्था से जुड़ा हुआ है |

इस अवसर पर मुनिश्री पवित्रसागर महाराज ने कहा कि समाज के अंदर संस्कृत भाषा के प्रति जाग्रति आना चाहिये एवं जिनवाणी को विसर्जन करने के पूर्व उसकी प्रतिलिपि को संरक्षित करें | तथाआचार्य ज्ञान सागर महाराज की स्मृति स्वरुप यंहा चरण चिंह स्थापित किये जाऐ इसका सभी मूनिसंघ ने समर्थन किया | इस अवसर पर बासू पूज्यसागर महाराज ने कहा कि संस्कृत भाषा भारत का गौरव है इस भाषा से दूर होते जा रहे है | पंचम काल की यह अनहोनी है जिनेन्द्र वर्णी से यह यात्रा प्रारंभ हुई और आचार्य ज्ञान सागर के रुप में पंडित भूरामल ने इसे आगे बढ़ाया है |

इस अवसर पर मुनिश्री अतुलसागर महाराज ने कहा कि ज्ञान के बिना श्रद्धा और ज्ञान दोनों अधुरे है उन्होंने स्यादवाद महाविद्यालय में संस्कृत का अध्यन कर रहे है उससे ही ज्ञान का प्रवाह होगा इस अवसर पर क्षु श्री संयम सागर महाराज उपस्थित थे | प्रोफेसर डा.आकाश जैन ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये सभी विद्वानों का स्वागत किया गया तत्पश्चात मुनिसंघ बनारस के घाटों का विहार करते हुये जैन घाट पर पहुंचे एवं वंहा के प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन किया |

इस अवसर परप्रोफेसर फूलचंद जैन प्रेमी,प्रो़ कमलेश जैन,प्रोफेसर विजय कुमार जैन,प्रो.अनेकांत जैन, समाज के सभी गणमान्य जन उपस्थित थे ||

Sallauddin Ali

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